पाकिस्तान में पेट्रोल और बिजली की कीमत में भारी बढ़ोतरी के खिलाफ लोगों में गुस्सा फैल रहा है। इससे शहबाज शरीफ सरकार बचाव की मुद्रा अपनाने पर मजबूर हुई है। उधर पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने अब अपने सरकार विरोधी अभियान में इस मुद्दे को प्रमुख बना लिया है। उनका इल्जाम है कि शरीफ सरकार के अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की ‘गुलामी’ करने के कारण पाकिस्तान की जनता पर यह भारी मार पड़ी है।
पीटीआई नेता इमरान खान ने शुक्रवार को खैबर पख्तूनवा प्रांत के बुनेर शहर में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि जब वे प्रधानमंत्री थे, तब उन पर भी आईएमएफ ने पेट्रोलियम के दाम बढ़ाने के लिए दबाव डाला था। लेकिन उन्होंने दबाव में आने से इनकार कर दिया। उन्होंने इल्जाम लगाया कि पाकिस्तान के मौजूदा शासकों ने अपने देशवासियों की मुसीबत से आंख फेर ली और आईएमएफ के दबाव में झुक गए।
विश्लेषकों के मुताबिक दो झटकों में बढ़ाई गई महंगाई से आम परिवारों का बजट बिगड़ने का अंदेशा है। इस वजह से लोग अब इमरान खान के इस आरोप पर ध्यान देने लगे हैं कि मौजूदा सत्ताधारी नेताओं ने अपनी तमाम संपत्ति विदेशों में जमा कर रखी है और उन्हें पाकिस्तान की हालत या भविष्य से कोई लेना-देना नहीं है। इसीलिए उसने ‘पेट्रोल बम’ गिराए हैं। पेट्रोल के दाम में हुई बढ़ोतरी के लिए ‘पेट्रोल बम’ शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले इमरान खान ने ही किया। फिर ये देश भर में चर्चित हो गया। बुनेर की सभा में इमरान खान ने ‘बिजली बम’ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह बम अभी आगे भी फटने वाला है। उनका इशारा बिजली शुल्क में संभावित अगली वृद्धि की तरफ था।
उधर प्रधानमंत्री शरीफ ने ग्वादार में एक समारोह में मौजूदा महंगाई का दोष पूर्व पीटीआई सरकार पर डाला। उन्होंने कहा कि अविश्वास प्रस्ताव पेश होने के बाद राजनीतिक कारणों से पूर्व सरकार ने पेट्रोलियम के दाम घटा दिए थे। उन्होंने कहा- ‘उन्होंने दाम घटा कर हमारे लिए जाल बिछाया था।’ शरीफ ने कहा- हमने दाम में बढ़ोतरी रोकने की पूरी कोशिश की, लेकिन पेट्रोलियम सब्सिडी के अतिरिक्त बोझ को देखते हुए हमारे पास कोई दाम बढ़ाने के अलावा चारा नहीं बचा था।