आतंकी फंडिंग के मामले में दोषी करार दिए गए जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के अलगाववादी नेता यासीन मलिक को दी गई उम्रकैद की सजा के बाद पाकिस्तान बौखला गया है। अब पाकिस्तान की संसद के संयुक्त सत्र में एक प्रस्ताव पारित किया गया है। इसमें कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक की सजा को लेकर निंदा की गई और कहा गया कि उन्हें फर्जी आरोपों में उम्रकैद की सजा दी गई है।
बौखलाए पाकिस्तान में पारित हुआ प्रस्ताव
ये प्रस्ताव संघीय मानवाधिकार मंत्री मियां रियाज़ हुसैन पीरज़ादा द्वारा प्रस्ताव पेश किया गया था। इसमें कश्मीरी लोगों को उनके वास्तविक नेतृत्व से वंचित करने के लिए भारत की आलोचना की गई।
इस प्रस्ताव में भारत सरकार से मांग की गई है कि यासीन मलिक के साथ उनकी पत्नी मुशाल मलिक और उनकी 10 साल की बेटी के साथ मुलाकात कराई जानी चाहिए। संयुक्त बैठक में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से भी भारत से यासीन मलिक सहित कब्जे वाले कश्मीर के सभी राजनीतिक नेताओं के खिलाफ मनगढ़ंत आरोपों को छोड़ने और उनकी सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
यासीन की सजा से तिलमिलाया है पाकिस्तान
इससे पहले सजा के एलान के बाद बौखलाए पाकिस्तान के विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बैचलेट को पत्र लिखकर कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक को भारतीय जेल से रिहा कराने की मांग की थी। पत्र में मलिक को सभी आरोपों से बरी कराने का आग्रह भी किया गया था।
वहीं पीएम शाहबाज शरीफ ने कहा था कि आज का दिन भारतीय लोकतंत्र और उसकी न्याय प्रणाली के लिए एक काला दिन है। भारत यासीन मलिक को शारीरिक रूप से कैद कर सकता है, लेकिन वह कभी भी उस स्वतंत्रता के विचार को कैद नहीं कर सकता, जिसका वह प्रतीक है। यासीन के लिए आजीवन कारावास कश्मीरियों के आत्मनिर्णय के अधिकार को नई गति प्रदान करेगा।