पहले इसे संसद के दोनों सदनों से पारित किया गया था और राष्ट्रपति के पास उनकी सहमति के लिए भेजा गया था। हालांकि, राष्ट्रपति ने यह कहते हुए इसे वापस भेज दिया था कि प्रस्तावित कानून संसद के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
पाकिस्तान की संसद ने शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की मामलों को स्वत: संज्ञान लेने एवं उन पर कार्रवाई और सुनवाई के लिए न्यायाधीशों के पैनल गठित करने के अधिकार को समाप्त करने के कानून को अधिसूचित कर दिया। इसके बाद पड़ोसी देश में विधायिका और न्यायपालिका के साथ मौजूदा तनाव के और गहराने की आशंका पैदा हो गई है।
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पहले इसे संसद के दोनों सदनों से पारित किया गया था और राष्ट्रपति के पास उनकी सहमति के लिए भेजा गया था। हालांकि, राष्ट्रपति ने यह कहते हुए इसे वापस भेज दिया था कि प्रस्तावित कानून संसद के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। विधेयक को 10 अप्रैल को अपदस्थ प्रधानमंत्री इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी के सांसदों के शोर-शराबे के बीच संसद की संयुक्त बैठक में कुछ संशोधनों के साथ दूसरी बार पारित किया गया था।
नेशनल असेंबली ने शुक्रवार को ट्वीट कर कहा, विधेयक अब कानून का रूप ले चुका है। क्योंकि संसद ने राष्ट्रपति की ओर से लौटाने के बाद विधेयक को 10 दिन के भीतर फिर से पारित कर दिया है। इसे राष्ट्रपति की ओर से सहमति मानी जाएगी। नेशनल असेंबली के ट्वीट में कहा गया है, मजलिस-ए-शूरा (संसद) के सर्वोच्च न्यायालय (कार्य एवं प्रक्रिया) अधिनियम, 2023 को इस्लामिक गणराज्य पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 75 के खंड (2) के तहत राष्ट्रपति से मंजूरी मिल गई है, यह मान लिया गया है। इसलिए, इसे सामान्य जानकारी के लिए प्रकाशित किया जाता है।
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पाकिस्तान में सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के नेतृत्व वाली सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट (कार्य एवं प्रक्रिया) विधेयक, 2023 पर जोर देने के बाद से न्यायपालिका और सत्तारूढ़ गठबंधन के बीच रिश्तों में तनाव आ गया है। मुख्य न्यायाधीश के स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करने एवं न्यायाधीशों की समिति बनाने के अधिकार को कम करने के लिए यह विधेयक लाने पर सरकार जोर दे रही थी।