पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान-अमेरिका टकराव के बीच पाकिस्तान एक बार फिर खुद को शांति दूत के रूप में पेश करने की कोशिश करता दिख रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने ईरान और अमेरिका के बीच जल्द शांति समझौता होने की उम्मीद जताई है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि आर्थिक संकट और क्षेत्रीय दबाव से जूझ रहा पाकिस्तान इस पूरे घटनाक्रम में अपनी उपयोगिता साबित करने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान की चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई है क्योंकि पश्चिम एशिया में लंबे तनाव का असर उसकी कमजोर अर्थव्यवस्था और तेल आपूर्ति पर सीधे पड़ सकता है।
क्या ईरान भी पाकिस्तान को रणनीतिक रूप से उपयोग कर रहा?
ईरान इस समय अमेरिका और इस्राइल के दबाव का सामना कर रहा है। ऐसे में वह पड़ोसी मुस्लिम देशों का समर्थन दिखाकर खुद को मजबूत स्थिति में दिखाना चाहता है। इसी कारण ईरान ने पाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर और तुर्किये जैसे देशों के सहयोग का जिक्र किया। हालांकि क्षेत्रीय राजनीति में पाकिस्तान की भूमिका सीमित मानी जाती है और बड़े फैसलों में उसकी सीधी भागीदारी कम ही दिखाई देती है।
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत अभी निर्णायक मोड़ पर नहीं पहुंची है। लेकिन पाकिस्तान लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि वह क्षेत्रीय शांति का समर्थक है। हालांकि सभी जानते हैं कि पाकिस्तान ऐसे मौकों पर अक्सर खुद को जरूरत से ज्यादा अहम दिखाने की कोशिश करता है, जबकि उसकी अपनी आंतरिक स्थिति कमजोर बनी हुई है।