पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ सऊदी अरब और चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं। उनका मुख्य मकसद दोनों देशों से वित्तीय सहायता हासिल करना होगा, ताकि पाकिस्तान जून में डिफॉल्ट (तय समय पर कर्ज ना चुका पाने) की स्थिति से बच सके। जून में पाकिस्तान को 2.5 बिलियन डॉलर का कर्ज या ब्याज चुकाना है। इसके लिए उसके विदेशी मुद्रा भंडार में पर्याप्त डॉलर नहीं हैं।
मार्च 2023 तक पाकिस्तान को 20 बिलियन डॉलर का विदेशी कर्ज चुकाना है। हाल में चीन और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) उसे पहले ही 4.5 बिलियन डॉलर की मदद दे चुके हैं। लेकिन ये रकम समस्या का सामना करने के लिहाज से पर्याप्त साबित नहीं हुई है। इस बीच देश से विदेशी पूंजी का पलायन शुरू हो गया है। उसकी वजह से डॉलर की तुलना में पाकिस्तानी रुपये की कीमत में भारी गिरावट आई है। फिच के मुताबिक इस साल मध्य फरवरी से एक अप्रैल तक पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में 5.1 बिलियन डॉलर की गिरावट आ गई है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अनुमान के मुताबिक 2022 में पाकिस्तान में मुद्रास्फीति की दर 11.2 फीसदी रहेगी। पिछले साल ये दर 8.9 फीसदी थी। इस वर्ष चालू खाते का घाटा 5.3 फीसदी तक पहुंच जाएगा। पिछले साल ये घाटा सिर्फ 0.6 फीसदी था। अमेरिकी थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल में पाकिस्तान इनिशिएटिव साउथ एशिया सेंटर के निदेशक उजैर युनूस ने कहा है कि पाकिस्तान की फौरी समस्या सिर्फ तभी दूर हो सकती है, अगर उसके हाथ में अधिक मात्रा में डॉलर पहुंचे। ऐसा या तो बॉन्ड बेचकर हो सकता है, या फिर तभी अगर चीन या सऊदी अरब उदारता दिखाएं।
युनूस ने वेबसाइट एशिया टाइम्स से कहा- ‘पाकिस्तान को आईएमएफ प्रोग्राम को पटरी पर लाना होगा। इससे बाजार में अनिश्चय घटेगा। साथ ही उससे सऊदी अरब और चीन को यह संदेश मिलेगा कि नई सरकार अर्थव्यवस्था को स्थिर करने के प्रति गंभीर है।’ पाकिस्तान के वित्त मंत्री 21 अप्रैल को आईएमएफ से बात करने वाशिंगटन गए। वहां उन्होंने मंजूर हुए छह बिलियन डॉलर के कर्ज की किश्तें फिर से जारी करने के बारे में बातचीत की।