पाक सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा (फाइल फोटो)
पाकिस्तान के समाचार पत्र डॉन ने सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा की उस टिप्पणी की आलोचना की है जिसमें उन्होंने पिछली सरकारों को वित्तीय कुप्रबंधन का दोषी ठहराया था। डॉन ने इस पर कहा है कि सेना प्रमुख को ‘राजनीतिक दायरे में अतिक्रमण’ नहीं करना चाहिए।
बता दें कि बाजवा ने शुक्रवार को नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी में सेमिनार को संबोधित करते हुए पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा था, ‘हम राजकोषीय कुप्रबंधन के कारण कठिन आर्थिक स्थिति से गुजर रहे हैं। हम कठिन फैसले लेने से कतराते रहे हैं।’
अपने अस्तित्व के 70 सालों में आधे से अधिक समय तक पाकिस्तान पर शासन करने वाली सेना ने सुरक्षा और विदेश नीति के मामलों में पकड़ बनाई हुई है। लेकिन अब यह पाकिस्तान के आर्थिक मामलों में भी भूमिका निभाती हुई देखी जा रही है क्योंकि सरकार गंभीर वित्तीय संकटों से जूझ रही है।
डॉन ने संपादकीय में कहा, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी ने सेना प्रमुख बाजवा को पिछले महीने राष्ट्रीय विकास परिषद के सदस्य के रूप में नामित किया। यह पहली बार है जब शीर्ष आर्थिक सलाहकार निकाय में सेना प्रमुख को शामिल किया गया है। यदि वित्तीय मामले में सेना को शामिल करने के नतीजे गंभीर आए तो इसका जवाबदेह कौन होगा। बेहतर होगा कि सेना प्रमुख राजनीतिक दायरे में अतिक्रमण की कोशिश नहीं करें।