आर्थिक और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहे पाकिस्तान में अब एक नया संकट खड़ा हो गया है। देश में बीते एक महीने के दौरान पोलियो के मामलों में बढ़ोतरी होने की खबर है। सिर्फ उत्तरी वजीरीस्तान जिले में बीते एक महीने में ऐसे आठ मामले सामने आए। यह जिला अफगानिस्तान की सीमा से लगा हुआ है। साल भर पहले यह मान लिया गया था कि पाकिस्तान में पोलियो पर काबू पा लिया गया है। उसके बाद पहली बार देश में पोलियो के मामले सामने आए हैं।
पाकिस्तानी मीडिया में इन दिनों आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता की खबरें छाई हुई हैं। इनके बीच पोलियो जैसे मसले दब कर रह गए हैं। ताजा खबर भी विदेशी मीडिया में जितनी प्रमुखता से आई है, उतना महत्त्व इसे देश के अंदर नहीं मिला है। विदेशी मीडिया में खबर आने के बाद सरकार ने इस मामले की जांच कराने का एलान किया है।
देश के पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम से जुड़े एक अधिकारी ने ब्रिटिश अखबार द गार्जियन से कहा- ‘टीकाकरण के बारे में गलत सूचना देना और टीका लगवाने से इनकार करना- इन दो कारणों से पोलियो की बीमारी फिर से फैली है।’ अधिकारी ने कहा कि मामलों को छिपाने में पोलियो कार्यक्रम से जुड़े कुछ कर्मचारी भी सहभागी बने हैं। ये कर्मचारी उन बच्चों की अंगुली पर भी टीकाकरण हो चुकने से संबंधित निशान लगा देते हैं, जिन्हें असल में टीका नहीं लगाया गया है।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक पाकिस्तान के दूर-दराज के इलाकों में जारी धार्मिक कट्टरपंथ पोलियो के खिलाफ संघर्ष में हमेशा एक बड़ी रुकावट रहा है। एक समय महजबी कट्टरपंथी संगठनों ने इस उन्मूलन कार्यक्रम से जुड़े अधिकारियों को निशाना बना रखा था। 2012 के बाद से पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम से जुड़े या इस कार्यक्रम में सहायता देने वाले 100 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। इनमें स्वास्थ्यकर्मी और सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक अब दुनिया में अफगानिस्तान और पाकिस्तान ही दो ऐसे देश हैं, जहां पोलियो एक आम बीमारी है। जानकारों के मुताबिक इसका एक बड़ा कारण मजहबी कट्टरपंथ है। मौलवियों ने टीकाकरण को लेकर कई भ्रम फैला रखे हैं। बच्चों को टीका लगवाने वाली माताओं को तलाक तक दे देने की घटनाएं यहां हुई हैं।