पाकिस्तान और सऊदी अरब ने अपने रणनीतिक रक्षा समझौते को सक्रिय कर दिया है। इसके तहत 13,000 पाकिस्तानी सैनिक और लड़ाकू विमान सऊदी अरब के एयरबेस पर तैनात किए गए हैं। इस समझौते की मुख्य शर्त यह है कि एक देश पर हमला होने पर दूसरा देश इसे अपने ऊपर हमला मानकर सैन्य कार्रवाई करेगा।
पश्चिम एशिया में बदलते सुरक्षा समीकरणों के बीच एक बड़ी खबर सामने आ रही है। पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच पिछले साल हुए रणनीतिक रक्षा समझौते पर अमल शुरू हो गया है। इसी समझौते के तहत पाकिस्तान ने अपनी सेना की एक बड़ी टुकड़ी और लड़ाकू विमानों का दस्ता सऊदी अरब भेज दिया है।
विज्ञापन
क्या है वजह?
सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, पाकिस्तान की इस सैन्य टुकड़ी में लगभग 13,000 सैनिक शामिल हैं। इसके साथ ही, पाकिस्तान एयरफोर्स के 10 से 18 लड़ाकू विमानों ने भी सऊदी अरब के पूर्वी क्षेत्र में स्थित किंग अब्दुलअजीज एयर बेस पर लैंड किया है। इस तैनाती का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना, किसी भी आपात स्थिति के लिए परिचालन तैयारी को बढ़ाना और क्षेत्रीय -अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा और स्थिरता को मजबूती देना है।
'एक पर हमला, दोनों पर हमला'
पाकिस्तानी सरकार के एक अधिकारी ने पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत, यदि सऊदी अरब या पाकिस्तान में से किसी एक पर भी हमला होता है, तो उसे दोनों देशों पर हमला माना जाएगा। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे नाटो देशों के बीच सुरक्षा संधि होती है।
महीनों पहले हुई थी तैनाती, अब हुआ खुलासा
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि यह तैनाती अचानक नहीं हुई है। विशेषज्ञ मोहम्मद मेहदी ने बताया कि पाकिस्तान ने अपने विमान और सैनिक पिछले महीने ही सऊदी अरब भेज दिए थे, लेकिन सऊदी अधिकारियों ने इसकी जानकारी अब सार्वजनिक की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तानी सैनिकों और लड़ाकू विमानों की मौजूदगी केवल सऊदी अरब की रक्षा के लिए है।
मिसाइल इंटरसेप्टर भी भेजे गए
खबरों के मुताबिक, केवल सैनिक और विमान ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान ने पिछले महीने सऊदी अरब को 'मिसाइल इंटरसेप्टर' भी भेजे हैं। यह कदम खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर हुए हमलों और बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब की हवाई सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए उठाया गया है।