पाकिस्तान में बलपूर्वक किसी को गायब करने को जघन्य अपराध माना जाएगा। इस आशय के विधेयक को निचले सदन ने दूसरी बार पारित किया है। पाकिस्तान में लोगों को सुरक्षा बलों द्वारा जबरन उठाकर ले जाने व बाद में उनके गायब होने की लगातार हो रही घटनाओं को देखते हुए यह विधेयक अहम है।
पाकिस्तान के कानून मंत्री आजम नजीर तरार द्वारा आपराधिक कानून (संशोधन) विधेयक- 2022 से विवादास्पद धारा 514 वापस लेने पर राजी होने के बाद शुक्रवार को विधेयक पारित किया गया। इसमें झूठी शिकायत दर्ज करने वालों को सजा का प्रावधान था।
पाकिस्तान के अखबार डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, कई सांसदों, जिनमें से ज्यादातर सत्तारूढ़ गठबंधन की पार्टियों से संबंधित थे, ने इसका विरोध किया और वर्तमान स्वरूप में विधेयक के समर्थन में मतदान से इनकार कर दिया था, उसके बाद विवादित धारा को हटा दिया गया। इस विधेयक को फिर सीनेट से पारित कराना होगा, ताकि यह संसद से पारित कानून बन सके।
बलूचिस्तान, कराची और कबायली इलाकों में लोगों के जबरन गायब होने का मुद्दा सालों से सुर्खियों में रहा है। कई बलूचों के भी गायब होने की खबरें आती रहती हैं। यह मामला विश्व मंचों पर भी उठाया गया था। जबरन गायब किए जाने को पाकिस्तान दंड संहिता 1860 और आपराधिक दंड प्रक्रिया 1898 में संशोधन के जरिए जघन्य अपराध बनाया जाएगा।
गायब होने वालों की संख्या हजारों में
पाकिस्तान में बड़ी संख्या में लोगों के गायब होने का मामला सुर्खियों में आने के बाद अंतरराष्ट्रीय दबाव में पाक सरकार ने एक दशक पहले एक आयोग का गठन् किया था। इसे कमीशन आफ एन्क्वायरी एनफोर्स्ड डिसअपियरेंस (COIED) नाम दिया गया था। आयोग को गायब होने के 8,463 मामिले मिले थे। आयोग अब तक इनमें से एक तिहाई मामलों का पता नहीं लगा सका है। गैर-सरकारी संगठन 'मैट फॉर पीस, डेवलपमेंट एंड ह्यूमन राइट्स एसोसिएशन' का दावा है कि पाक सेना बिना किसी आरोप के गिरफ्तार करती है और वह कानून के दायरे से बाहर रहती है।
डॉन के अनुसार, निचले सदन ने जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय की 75वीं वर्षगांठ से पहले नई दिल्ली की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव भी पारित किया।