हाल के स्थानीय चुनावों में सत्ताधारी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की बुरी हार के बाद पार्टी में प्रधानमंत्री इमरान खान की हैसियत कमजोर पड़ने के संकेत मिल रहे हैं। पीटीआई को खास झटका उसके गढ़ खैबर पख्तूनवा प्रांत में हार से लगा। उसके बाद इमरान खान ने पार्टी के सांगठनिक ढांचे को भंग करने का एलान किया। उन्होंने पार्टी पदों पर नई नियुक्तियां कर दीं। लेकिन उनके इस फैसले से पार्टी में असंतोष भड़क गया है।
हार के जिम्मेदार नेताओं पर कार्रवाई
पाकिस्तानी मीडिया की खबरों में बताया गया है कि इमरान खान ने पार्टी की प्रमुख समितियों को भंग इसलिए किया, ताकि जिन नेताओं को वे हाल की हार के लिए जिम्मेदार मानते हैं, उन्हें हटा सकें। खान के समर्थकों ने कहा कि प्रधानमंत्री ने पार्टी में फिर से जान फूंकने और उसे फिर सक्रिय करने के उद्देश्य से नए ढांचे की नियुक्ति का फैसला किया। इसके तहत पार्टी का पूरा ढांचा बदल दिया गया है।
लेकिन पार्टी के कई नेताओं ने पाकिस्तानी अखबारों से बातचीत में कहा कि सबको कठघरे में खड़ा कर देने के बजाय होना यह चाहिए था कि हार की साफ जवाबदेही तय की जाती। इसके लिए जिन नेताओं का दोष होता, उन्हें ही हटाया जाता। पंजाब प्रांत के एक नाराज नेता ने अखबार डॉन से कहा कि पार्टी संगठन को भंग करने के पीछे क्या तर्क है, इसे समझने में हम नाकाम हैं।
पार्टी में गहरा असंतोष
पाकिस्तानी अखबरों में ऐसी कई रिपोर्टें छपी हैं, जिनमें बताया गया है कि इमरान खान के इस कदम को लेकर पार्टी में गहरा असंतोष है। इन रिपोर्ट्स के मुताबिक पार्टी नेताओं ने अपना नाम ना छापने की शर्त पर कहा है कि इस फैसले से स्थानीय चुनाव के अगले चरणों और अगले आम चुनाव में पीटीआई की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। एक नेता ने कहा कि खैबर पख्तूनवा में पार्टी स्वच्छ प्रशासन देने में अपनी नाकामी की वजह से हारी। फिर बड़े नेताओं ने अपने खास लोगों को टिकट दिलवाए। अब उन्हें दंडित करने के बजाय पीटीआई के पूरे संगठन को ही दंडित कर दिया गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीटीआई के नेताओं और कार्यकर्ताओं में ये आम धारणा है कि ज्यादातर केंद्रीय मंत्री अपने-अपने विभागों में अपेक्षित प्रदर्शन करने में विफल रहे हैं। जबकि अब उन्हें अतिरिक्त जिम्मेदारी देते हुए पार्टी संगठन का काम भी सौंप दिया गया है। गौरतलब है कि ताजा फेरबदल में कई संघीय मंत्रियों को पार्टी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें विशेष पहल मंत्री असर उमर भी हैं, जिन्हें पार्टी का महासचिव बना दिया गया है। बताया जाता है कि पार्टी के अंदर सबसे ज्यादा अंसतोष मंत्रियों को सांगठनिक जिम्मेदारी देने के फैसले ही भड़का है।
अब संघीय शिक्षा मंत्री शफाकत महमूद को पीटीआई की पंजाब शाखा का अध्यक्ष बना दिया गया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पंजाब प्रांत के एक पीटीआई नेता ने अखबार डॉन से कहा कि उनकी देखरेख में ही लड़े गए चुनाव में पार्टी पंजाब प्रांत में स्थानीय चुनावों में पराजित हुई थी। अब उन्हें प्रांतीय अध्यक्ष बना दिया गया है। पर्यवेक्षकों का कहना है कि अब तक पीटीआई में इमरान खान की हैसियत सर्वोच्च नेता की थी। ऐसा संभवतः पहली बार है, जब पार्टी के नेता और कार्यकर्ता उनके फैसले पर विरोध जता रहे हैं।