अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से निराशा हाथ लगने के बाद अब पाकिस्तान चीन की तरफ और भी ज्यादा झुकता नजर आ रहा है। इसके साथ ही आईएमएफ से उसकी जुबानी जंग तेजी होती जा रही है। अब तक आईएमएफ पर जुबानी हमला पाकिस्तान के वित्त मंत्री या उनसे निचले स्तर के अधिकारी बोल रहे थे। अब खुद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मोर्चा संभाला है। साथ ही उन्होंने खुलेआम ‘समय पर मदद देने के लिए’ चीन का आभार जताया है।
चीन ने अपने लिए अनुकूल मौका देखते हुए पाकिस्तान में परमाणु बिजली संयंत्र लगाने का एक नया करार कर लिया है। इस समझौते पर मंगलवार को दस्तखत हुए। बताया गया है कि बनने वाले एटमी प्लांट से 1,200 मेगावाट बिजली पैदा होगी। यह संयंत्र पूरी तरह चीन के निवेश से लगेगा। इस समझौते पर दस्तखत होने के मौके पर शहबाज शरीफ ने चीन को ऐसा सहयोगी बताया, जिस पर सबसे ज्यादा भरोसा किया जा सकता है। चाश्मा 5 न्यूक्लीयर पॉवर प्लांट के लिए करार होने के बाद शरीफ ने कहा कि एक तरफ पाकिस्तान को आईएमएफ से ऋण मिलने का अभी भी इंतजार है, वहीं चीन ने आगे आकर मदद दी है और संकट के वक्त पाकिस्तान को बचाया है।
शहबाज शरीफ ने कहा कि हालांकि कुछ अन्य देशों ने भी पाकिस्तान की मदद की है, लेकिन चीन से मिली सहायता खास महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने कहा- ‘चीन ने ऐसी मदद की है, जिसके लिए उसके प्रति आभार जताने का शब्द उनके पास नहीं है।’ शरीफ ने दावा किया कि पाकिस्तान ने ऋण कार्यक्रम की नौवीं समीक्षा के तहत आईएमएफ की सारी शर्तें पूरी कर दी हैं। इसके बावजूद इस संस्था ने पाकिस्तान के लिए कर्ज की रकम जारी नहीं की है। इस बीच चीन के अलावा सऊदी अरब और कतर ने पाकिस्तान की मदद की है।
इस बीच आईएमएफ से ऋण पाने की कोशिश में पाकिस्तान ने करीब दर्जन भर देशों से संपर्क किया है। पाकिस्तान के लिए नई मुश्किल अगले वित्त वर्ष के लिए पेश शरीफ सरकार के बजट से पैदा हुई है। आईएमएफ ने इस बजट की यह कहते हुए आलोचना की है कि इसमें उसकी शर्तों के मुताबिक राजस्व जुटाने और कर ढांचे को ढालने के उपाय नहीं किए गए हैं। पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशहाक डार ने इस आलोचना पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी। लेकिन शहबाज शरीफ ने स्थिति को संभालने की कोशिश में कहा कि उनका देश आईएमएफ की चिंताओं को दूर करने के लिए तैयार है।
चाश्मा-5 संयंत्र पंजाब प्रांत में लगेगा। चीन ने कहा है कि वह जीवाश्म ऊर्जा से अक्षय ऊर्जा की तरफ पाकिस्तान के जाने में पूरी मदद करेगा। इस परियोजना के पूरी होने के बाद पाकिस्तान के पास परमाणु ऊर्जा की पैदा करने क्षमता 1,400 मेगावाट तक पहुंच जाएगी। इसके पहले कराची बंदरगाह के पास एक एक परणाणु बिजली संयंत्र लगा था। यह संयंत्र भी चीन की मदद से ही लगाया गया था।
जानकारों के मुताबिक यह अभी साफ नहीं है कि नई परियोजना चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) का हिस्सा है या नहीं। बीआरआई के तहत चीन पहले से ही पाकिस्तान में 65 बिलियन डॉलर का निवेश कर रहा है।