पाकिस्तान की विदेश नीति पर सेना का कितना असर है, उसकी एक मिसाल फिर देखने को मिली है। प्रधानमंत्री इमरान खान तीन फरवरी से शुरू होने वाली अपनी चीन यात्रा के पहले सैन्य अधिकारियों की ‘क्लास’ में हाजिर हुए। इस मौके पर खान सरकार के प्रमुख मंत्री और उनके राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद यूसुफ भी मौजूद थे। बताया जाता है कि सेनाध्यक्ष जनरल कमर बाजवा ने पाकिस्तान-चीन संबंधों के बारे में अपनी राय इस बैठक में मौजूद नेताओं और अधिकारियों को बताई। बैठक में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख जनरल नदीम अंजुम भी शामिल हुए।
अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान और चीन के संबंध इस समय नाजुक मोड़ पर हैं। ऐसी आम धारणा बनी है कि जब से इमरान खान प्रधानमंत्री बने हैं, तब से चीन-पाकिस्तान इकॉनमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) परियोजना पर काम धीमा हो गया है। इसलिए चीन नाखुश है। इमरान खान की अगली चीन यात्रा बीजिंग में आयोजित विंटर ओलिंपिक खेलों के मौके पर हो रही है। खान विंटर ओलिंपिक के उद्घाटन समारोह में हिस्सा लेंगे। लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस यात्रा के दौरान वे चीनी नेताओं के मन में बैठी ‘गलतफहमियों’ को भी दूर करना चाहते हैँ।
बताया जाता है कि चीन की नाराजगी खास तौर पर पिछले साल जुलाई में डासू पनबिजली परियोजना के स्थल पर हुए आतंकवादी हमले के बाद बढ़ी। उस हमले में दस चीनी कर्मियों की मौत हो गई थी। तब चीन ने यह दो टूक कहा थ कि सीपीईसी पर काम आगे बढ़ने की यह पूर्व शर्त है कि पाकिस्तान में चीनी नागरिकों की सुरक्षा की अचूक व्यवस्था की जाए।
एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने सरकारी अधिकारियों के हवाले से कहा है कि बीते जुलाई में हुए हमले के बाद पाकिस्तान ने चीनी परियोजनाओं के स्थल पर सुरक्षा के प्रोटोकॉल में सुधार किया है। इसके अलावा पाकिस्तान सरकार ने मारे गए चीनी कर्मियों के परिजनों को कुल एक करोड़ 16 लाख डॉलर के मुआवजे का भुगतान किया है। पाकिस्तानी अधिकारियों ने भरोसा जताया है कि इन कदमों से चीन को संतुष्ट करने में मदद मिलेगी।