पाकिस्तान में राजनीतिक उथल-पुथल का दौर जारी है। नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव को बिना वोटिंग के ही पास किए जाने और पीएम इमरान खान की ओर से संसद भंग किए जाने की सिफारिश के खिलाफ विपक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। हालांकि, इस बीच पाकिस्तान में सियासी घटनाक्रम उसी तरह बढ़ रहा है, जैसा सरकार ने तय किया है। फिर चाहे वह राष्ट्रपति द्वारा संसद भंग करने का फैसला हो या अंतरिम प्रधानमंत्री के लिए नाम प्रस्तावित करने का। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के नेता फवाद चौधरी ने सोमवार को बताया कि उनकी पार्टी ने अंतरिम प्रधानमंत्री के लिए गुलजार अहमद का नाम आगे बढ़ाया है।
क्यों चौंकाने वाला है पीटीआई की तरफ से गुलजार का नाम बढ़ाना?
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ की तरफ से गुलजार अहमद का नाम प्रस्तावित किया जाना अपने आप में एक चौंकाने वाली बात है। दरअसल, गुलजार अहमद 21 दिसंबर 2019 से लेकर 1 फरवरी 2022 तक पाकिस्तान के चीफ जस्टिस के पद पर रहे। इस दौरान गुलजार ने पाकिस्तान की पीटीआई सरकार को कई मुद्दों पर फटकार लगाई। इतना ही नहीं एक वक्त तो ऐसा भी था, जब सीजेआई ने एक मामले में सीधा तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान को समन भेजने की चेतावनी तक दे दी थी।
अब जानिए कौन हैं गुलजार अहमद?
गुलजार अहमद का जन्म दो फरवरी 1957 को कराची में हुआ था। उनके पिता नूर मोहम्मद कराची के एक जाने-माने वकील थे। जस्टिस अहमद ने अपने पढ़ाई कराची के ही गुलिस्तां स्कूल से की। इसके बाद उन्होंने आर्ट्स की डिग्री हासिल की और फिर कराची के एसएम कॉलेज से कानून की पढ़ाई पूरी की। गुलजार अहमद का कानून से जुड़ा करियर दो भागों में बंटा है। एक चरण वकील के तौर पर और दूसरा भाग जज का पद संभालते हुए।
1. वकील के तौर पर
18 जनवरी 1986 को उन्होंने वकालत शुरू की। इसके बाद चार अप्रैल 1988 को उन्होंने हाईकोर्ट में वकालत संभाली। 1999-2000 के बीच वे सिंध हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के मानद सचिव भी चुने गए। इसके बाद 2001 में वे वकील के तौर पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।
2. जज के तौर पर
गुलजार को पहली बार 27 अगस्त 2002 को सिंध हाईकोर्ट के जज के तौर पर नियुक्त किया गया। इसके बाद उन्हें हाईकोर्ट में ही 14 फरवरी 2011 को सीनियर जज के तौर पर पदोन्नति दी गई। इसी साल उन्हें सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर नियुक्त किया गया।
किन बड़े मामलों से जुड़ा नाम?
जस्टिस गुलजार अहमद उस पांच सदस्यीय जजों की बेंच का हिस्सा थे, जिसने पनामा पेपर्स मामले में सुनवाई की थी और प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पद से अयोग्य घोषित कर दिया था। पनामा पेपर्स केस के अलावा उन्होंने कई बार सरकार और नौकरशाहों को आड़े हाथों भी लिया है। कई मौकों पर तो उन्होंने इमरान खान की सरकार को भी लताड़ लगाई।
ऐसा ही एक मामला तब सामने आया था, जब इमरान सरकार ने 2014 में पाकिस्तान के एक स्कूल पर हमला करने वाले आतंकी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान पर बैन हटा लिया था। इसके बाद सीजेआई गुलजार ने कहा था कि आप (इमरान) अभी सत्ता में हैं और सरकारी उनकी है, लेकिन आपने दोषियों को समझौते की टेबल पर लाने का काम किया है। उन्होंने इमरान सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि अरबों रुपये खर्च करने के बाद सरकार इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर पाई।
इसके अलावा एक अन्य मामले की सुनवाई के दौरान जब इमरान सरकार ने सैन्य कैंप पर हमले के आरोपी को कोर्ट के सामने पेश नहीं किया था, तब गुलजार अहमद ने यह तक चेतावनी दे दी थी कि अगली सुनवाई के लिए वे कोई गुंजाइश नहीं छोड़ेंगे और सीधे प्रधानमंत्री इमरान खान को ही समन भेज देंगे।