पाकिस्तान में सेना और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के समर्थकों के बीच कड़वाहट बढ़ने के संकेत हैं। इमरान खान के समर्थक सोशल मीडिया लगातार सेना के खिलाफ माहौल बनाए हुए हैं। इससे विचलित सेना की तरफ से अब कहा गया है कि सेना सिर्फ इसीलिए देश की सेवा कर पाई है, क्योंकि उसमें जनता का अटूट भरोसा रहा है। सैन्य हलकों में परेशानी इसलिए बढ़ी है, क्योंकि इमरान खान की जन सभाओं में भारी भीड़ इकट्ठी हो रही है और इन सभाओं में पूर्व इमरान खान सरकार को सत्ता से हटाने के लिए ‘विदेश में रची गई साजिश’ की बात पुरजोर ढंग से कही जा रही है। सोशल मीडिया पर इस प्रकरण में सेना को भी लपेटा गया है।
सेना के प्रवक्ता ने गुरुवार को खंडन किया कि पिछले महीने राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (एनएससी) की बैठक में ‘साजिश’ की बात को स्वीकार किया गया। एनएससी में देश के सर्वोच्च सैनिक और खुफिया अधिकारी भी शामिल हैं। अब सेना ने कहा है कि एनएससी की बैठक में अमेरिका को विरोध पत्र भेजने पर जो सहमति बनी थी, वह सरकार बदलने की साजिश के खिलाफ नहीं, बल्कि पाकिस्तान के अंदरूनी मामलों में अमेरिका के कूटनीतिक हस्तक्षेप के खिलाफ थी। सेना के जन संपर्क विभाग के महानिदेशक जनरल बाबर इफ्तिखार ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा- ‘आप साफ तौर पर देख सकते हैं कि एनएनसी के बयान में साजिश शब्द लिखा है या नहीं।’
जब इमरान खान सरकार के खिलाफ पेश अविश्वास प्रस्ताव पर विवाद गरम था, तभी सेना के भूमिका को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। तब कुछ मीडिया रिपोर्टों में बताया गया था कि इमरान खान सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा को इस साल के अंत में रिटायरमेंट के बाद सेवा विस्तार नहीं देने को तैयार नहीं हैं। इससे जनरल बाजवा उनसे खफा हैं। नौ अप्रैल को जब नेशनल असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा चल रही थी, जब ये अफवाह तेजी से फैली कि इमरान सरकार ने जनरल बाजवा को बर्खास्त कर दिया है। हालांकि तुरंत ही इमरान खान ने इसका खंडन कर दिया।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक पाकिस्तान की राजनीति में सेना की हमेशा ही परदे के पीछे महत्त्वपूर्ण भूमिका रही है। इसलिए इमरान खान की सरकार गिरने के बाद से उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के समर्थक खुलेआम सेना की आलोचना कर रहे हैं। इसी सिलसिले में जनरल इफ्तिखार ने यह सफाई भी दी कि जनरल बाजवा ने ना तो सेवा विस्तार मांगा है, और ना ही वे ऐसी किसी पेशकश को स्वीकार करेंगे। 29 नवंबर 2022 को अपना कार्यकाल पूरा होने के बाद वे रिटायर हो जाएंगे।
राजनीतिक विशेषज्ञों ने कहा है कि पाकिस्तान में इसके पहले कभी सेना को ऐसी बचाव की मुद्रा में नहीं देखा गया। वह कभी इस तरह सफाई देती नजर नहीं आई। जनरल इफ्तिखार ने गुरुवार को यह भी सफाई भी दी कि सेना की भूमिका अराजनीतिक है और उसने राजनीतिक मसलों में खुद को शामिल ना करने का फैसला किया हुआ है।
लेकिन सेना के ऐसे स्पष्टीकरणों के बावजूद पीटीआई के समर्थक विदेशी साजिश का हौव्वा खड़ा किए हुए हैँ। जिस रोज जनरल इफ्तिखार साजिश की बात का खंडन किया, उसी दिन पूर्व सूचना मंत्री फव्वाद चौधरी ने इस आरोप की जांच के लिए न्यायिक आयोग के गठन मांग उठा दी कि इमरान खान की सरकार को गिराने की साजिश अमेरिका ने रची।