फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pakistan: चीन की ‘फौलादी दोस्ती’ पर मंडरा रहा है आईएमएफ का घना साया

Tue, 20 Sep 2022 07:12 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

Pakistan: विदेशी मुद्रा के बढ़ते संकट के कारण आईएमएफ से कर्ज लेना पाकिस्तान की मजबूरी है। बीते जुलाई में पाकिस्तान सरकार ने आईएमएफ को आश्वस्त किया था कि वह चीन की निजी बिजली कंपनियों को भुगतान की मात्रा घटाएगी...
विज्ञापन
Pakistan: cpec - फोटो : Agency (File Photo)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ शंघाई सहयोग संगठन के शिखर सम्मेलन के दौरान समरकंद में चीन के राष्ट्रपति शी जिनिपंग से मिले। उसके तुरंत बाद पाकिस्तान के सेनाध्यक्ष जनरल कमर जावेद बाजवा ने बिना पूर्व घोषित कार्यक्रम बीजिंग की यात्रा की है। इस घटनाक्रम से यहां पाकिस्तान और चीन के रिश्तों में गरमाहट लौटने चर्चा जोर पकड़ गई है। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि ऐसी गर्मजोशी लौटने के बीच फिलहाल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का एक बड़ा पेंच फंसा हुआ है।

पाकिस्तान और चीन अपने संबंध को ‘फौलादी दोस्ती’ बताते हैं। ताजा मुलाकातों के बाद भी कहा गया है कि दोनों देशों का ‘फौलादी भाईचारा समय की कसौटी पर खरा उतरा है।’ लेकिन विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि इस रिश्ते के बीच पाकिस्तान में चीनी कंपनियों के बिजली संयंत्रों से बिजली खरीद के भाव का मुद्दा एक बड़ा पेंच बन गया है। ये बिजली संयंत्र चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) का हिस्सा हैं। आईएमएफ ने पाकिस्तान से कहा है कि वह इस संयंत्रों से बिजली के खरीद भाव पर दोबारा बातचीत करे। आईएमएफ की शिकायत है कि पाकिस्तान इस संयंत्रों से जरूरत से ज्यादा कीमत पर बिजली खरीद रहा है।

विदेशी मुद्रा के बढ़ते संकट के कारण आईएमएफ से कर्ज लेना पाकिस्तान की मजबूरी है। बीते जुलाई में पाकिस्तान सरकार ने आईएमएफ को आश्वस्त किया था कि वह चीन की निजी बिजली कंपनियों को भुगतान की मात्रा घटाएगी। ऐसा या तो वह बातचीत के जरिए उन कंपनियों को बिजली की दर घटाने पर राजी करके करेगी या फिर चीन के बैंकों से लिए कर्ज के भुगतान में देरी करेगी। लेकिन अभी तक चीन इनमें से किसी उपाय के लिए राजी नहीं हुआ है।

अमेरिका स्थित आर्थिक विश्लेषक नदीम हुसैन के मुताबिक आईएमएफ को अंदेशा था कि चीनी कंपनियों से पाकिस्तान पर दबाव पड़ेगा और यह संभव है कि आईएमएफ से मिले कर्ज का पूरा हिस्सा पाकिस्तान चीनी कंपनियों को ही दे दे। हुसैन ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘इसीलिए आईएमएफ मौजूदा कर्ज इस शर्त पर मंजूर किया कि उससे मिली रकम का भुगतान चीनी बिजली कंपनियों को नहीं किया जाएगा।’ आईएमएफ ने दो हफ्ते पहले पाकिस्तान के लिए 1.17 बिलियन डॉलर का कर्ज जारी कर दिया था।

पाकिस्तान पर चीनी निजी बिजली कंपनियों का 1.1 बिलियन डॉलर बकाया है। देश के बिजली सेक्टर पर कुल कर्ज 11 बिलियन डॉलर का हो चुका है। आईएमएफ ने चेतावनी दी है कि चीनी कर्ज के बोझ के कारण पाकिस्तान को दिया जाने वाला कर्ज सुरक्षित नहीं रह गया है।

पर्यवेक्षकों की राय है कि अगर पाकिस्तान आईएमएफ की सलाह पर चला, तो उससे चीन नाराज होगा। उन्होंने ध्यान दिलाया है कि चीनी बिजली कंपनियों के मामले में बिना चीन को भरोसे में लिए पाकिस्तान ने आईएमएफ से वादा कर लिया। इसके अलावा वह चीनी बिजली कंपनियों को भुगतान के लिए एक विशेष (एस्क्रॉ) खाता खोलने के अपने वादे से भी मुकर गया है।

पूर्व इमरान सरकार मे मंत्री रहे हारुन शरीफ ने कहा है- ‘चीन की कंपनियां लंबे समय से बेहद नाराज हैं। चीन का रुख है कि इन कंपनियों से हुआ करार व्यापारिक समझौता है। ये समझौते मौजूद कानून के तहत हुए हैं। इसलिए पाकिस्तान सरकार क्या कहती है, उससे सुनने के लिए निजी कंपनियां मजबूर नहीं हैं।’ जबकि आईएमएफ भी इस मामले में कोई रियायत बरतने को तैयार नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें