पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। कई बार मुंह की खाने के बाद भी वह जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को छोड़ने तक के लिए तैयार नहीं है। पाक ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के समक्ष फिर से कश्मीर राग छेड़ा।
जेनेवा में यूएनएचआरसी के सत्र में पाकिस्तान ने कश्मीर में सभी राजनीतिक नेताओं व कार्यकर्ताओं को रिहा कराने की मांग की। साथ ही कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय द्वारा किसी भी तरह की 'निष्क्रियता' से सिर्फ भारत में स्थितियां खराब होंगी।
24 फरवरी से 20 मार्च तक स्विट्जरलैंड में चलने वाले मानवाधिकार परिषद के 43वें सत्र में पाकिस्तान की मानवाधिकार मंत्री शीरीन मजारी ने पाकिस्तान का पक्ष रखा। उन्होंने भारत पर कश्मीरी नागरिकों के मानवाधिकार अधिकारों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया।
मजारी ने आरोप लगाया कि 'छह हजार से ज्यादा कश्मीरी नागरिक, कार्यकर्ता गिरफ्तार किए गए हैं।' इन्हें तुरंत रिहा किया जाना चाहिए। उन्होंने यूएनएचआरसी और अन्य अंतरराष्ट्रीय समुदाय से जम्मू कश्मीर पर तुरंत कार्रवाई करने की अपील की।
मजारी ने पहले यूरोपीय संघ पर कश्मीर में भारत द्वारा मानवाधिकारों के उल्लंघन का उल्लेख नहीं करके भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया था। भारतीय प्रतिनिधि विकास स्वरुप, सचिव (पश्चिम) यूएनएचआरसी को 26 फरवरी को संबोधित करेंगे और उम्मीद है कि वह पाकिस्तान के आरोपों का जवाब देंगे। वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) की तरह पाकिस्तान के पास 47 सदस्यीय यूएनएचआरसी में अपने करीबी सहयोगियों मलयेशिया और तुर्की का समर्थन नहीं है। वहीं उनका सदाबहार दोस्त चीन भी इसका सदस्य नहीं है।
पाकिस्तान की मानवाधिकार मंत्री शीरीन मजारी यूरोपीय संघ में भारत के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर पाई थीं।