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Pakistan: आईएमएफ से कर्ज पाने में नाकामी का ठीकरा फूटेगा पूर्व वित्त मंत्री पर! वायरल हो रही एक ऑडियो क्लिप

Mon, 13 Feb 2023 02:38 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

Pakistan: गृह मंत्री राना सनाउल्लाह ने शौकत तरीन की गिरफ्तारी का आदेश दिया है। इसके लिए पिछले साल अगस्त में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक ऑडियो क्लिप का सहारा लिया गया है। आरोप था कि उस ऑडियो में शौकत तरीन की आवाज थी...
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Pakistan former Finance Minister Shaukat Tareen - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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पाकिस्तान में शहबाज शरीफ सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से मिलने में हो रही देर को अंदरूनी सियासत का मसला बना दिया है। उसने अब इसकी जिम्मेदारी विपक्षी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) पार्टी पर डालने की पहल कर दी है। इसके लिए पूर्व इमरान खान सरकार में वित्त मंत्री रहे शौकत तरीन की गिरफ्तारी की योजना बनाई गई है। उन पर इल्जाम लगाया गया है कि उन्होंने नए कर्ज के लिए आईएमएफ के साथ हुए करार को पटरी से उतराने की कोशिश की।

एक टीवी चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक गृह मंत्री राना सनाउल्लाह ने शौकत तरीन की गिरफ्तारी का आदेश दिया है। इसके लिए पिछले साल अगस्त में सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक ऑडियो क्लिप का सहारा लिया गया है। आरोप था कि उस ऑडियो में शौकत तरीन की आवाज थी। उसमें तरीन खैबर पख्तूनवा और पंजाब प्रांत की सरकारों को यह सलाह देते सुने गए थे कि वे उस समय आई भीषण बाढ़ का बहाना बना कर अपने प्रांतों के बजट को फायदे में लाने में अक्षमता जता दें। जबकि शहबाज शरीफ सरकार आईएमएफ के साथ करार में इस बात पर राजी हुई थी कि सभी प्रांतों के बजट को फायदे में लाया जाएगा।

खैबर पख्तूनवा के वित्त मंत्री ने उसी समय संघीय वित्त मंत्रालय को पत्र लिख कर अपने बजट को सरप्लस में लाने में अक्षमता जताई थी। ऑडियो क्लिप वायरल होने के बाद पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी एफआईए ने शौकत तरीन के खिलाफ जांच शुरू करने की घोषणा की थी। अब शरीफ सरकार की तरफ से कहा गया है कि एफआईए की जांच पूरी हो गई है और उसने तरीन के खिलाफ कानूनी कार्यवाही शुरू करने की इजाजत मांगी है। सरकार ने यह इजाजत दे दी है, जिसके तहत उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा।

इस बीच शहबाज शरीफ सरकार को देश में सभी आयातों पर खाद्य शुल्क लगाने और बैंक में रकम जमा करने पर टैक्स लगाने का इरादा छोड़ना पड़ा है। शरीफ सरकार ने यह प्रस्ताव भी आईएमएफ की शर्तों को पूरा करने के लिए रखा था। आईएमएफ ने पाकिस्तान सरकार पर राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने की शर्त लगा रखी है। अगर ये नए शुल्क लगाए जाते, तो उससे संघीय सरकार को अरबों रुपये की आमदनी होती। लेकिन देश में इस प्रस्ताव की कड़ी आलोचना हो रही थी। इसे बेहद दमनकारी कदम बताया जा रहा था।

अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के सेंट्रल बैंक- स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान और वाणिज्य मंत्रालय ने भी इस कदम से असहमति जताई थी। उनकी राय थी कि इन कदमों का देश की वित्त व्यवस्था पर बहुत खराब असर होगा। साथ ही आयात पर खाद्य शुल्क लगाने से विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के नियमों का उल्लंघन भी होगा। एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक आईएमएफ के अधिकारी भी इस कदम से सहमत नहीं थे।  

पर्यवेक्षकों के मुताबिक यह कदम वापस लेने के बाद अब शरीफ सरकार के लिए राजकोषीय घाटे पर नियंत्रण पाना और कठिन हो जाएगा। इससे आईएमएफ के ऋण पाने में मौजूद मुश्किलें बनी रहेंगी। समझा जाता है कि अपनी इन नाकामियों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए शरीफ सरकार ने पूर्व वित्त मंत्री पर कार्रवाई की योजना बनाई है।

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