परवेज मुशर्रफ का जन्म 11, अगस्त 1943 को दिल्ली के दरियागंज में हुआ था। भारत के विभाजन के बाद उनका परिवार कराची जाकर बस गया। बाद में वे पाकिस्तान के राष्ट्रपति और सेना प्रमुख बने। इन्होंने साल 1999 में नवाज शरीफ की लोकतांत्रिक सरकार का तख्ता पलट कर पाकिस्तान की बागडोर संभाली और 20 जून, 2001 से 18 अगस्त 2008 तक पाकिस्तान के राष्ट्रपति रहे। जब मुशर्रफ ने अप्रैल 2005 में पाकिस्तान के राष्ट्रपति के रूप में भारत का दौरा किया था तब भारत सरकार ने उन्हें एक विशेष उपहार के रूप में उनका जन्म प्रमाण पत्र दिया था।
पुरानी दिल्ली के जिस घर में मुशर्रफ का जन्म हुआ था, वो अब काफी पुराना और कमजोर हो चुका है। हालांकि उस आलीशान घर को देखकर इस बात का अंदाजा अब भी लगाया जा सकता है कि मुशर्रफ उन दिनों पुरानी दिल्ली के जानेमाने परिवार से ताल्लुक रखते थे। अब उस हवेलीनुमा घर में आठ परिवार रहते हैं। साल 2001 में भारत दौरे के पहले दिन मुशर्रफ पुरानी दिल्ली के उस मकान में गए थे, जहां उनका बचपन गुजरा था। विभाजन के बाद मुशर्रफ के परिवार ने पाकिस्तान जाने का फैसला किया और पुरानी दिल्ली के उस घर को छोड़कर सबलोग पाकिस्तान चले गए। उस समय मुशर्रफ मात्र चार साल के थे।
2001 के समय जो लोग उस घर में रहते थे, उनमें से अधिकतर को तो इस बात की जानकारी भी नहीं थी कि उसके असली मालिक कौन हैं? घर के असली कागजातों पर सारी जानकारियां उर्दू में लिखी हुई हैं, जिनपर मुशर्रफ के पिता के नाम से अंग्रेजी में हस्ताक्षर किए हुए हैं। आश्चर्य की बात यह है कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संस्थापक और अल्पसंख्यक समुदाय के नेता सर सैयद अहमद मुशर्रफ के पड़ोस वाले मकान में ही रहते थे। मुशर्रफ के पुराने घर के आसपास के इलाके बहुत पॉश, संकरे और गंदे हैं।
अप्रैल से जून-1999 तक भारत और पाकिस्तान के बीच हुए करगिल युद्ध के दौरान परवेज मुशर्रफ सुर्खियों में आए। क्योंकि उस दौरान मुशर्रफ ही पाकिस्तान के सेना-प्रमुख थे। सेनाध्यक्ष रहते हुए उन्होंने भारत को कई ऐसे जख्म दिये, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारते हुए रिश्तों को नए आयाम तक पहुंचाया, लेकिन उनकी यह पहल लंबे समय तक कायम नहीं रह पाई। माना जाता है कि परवेज मुशर्रफ ही अटल बिहारी का साथ देने में पीछे हट गए थे।
जनरल परवेज मुशर्रफ 1961 में पाकिस्तानी सेना में शामिल हुए थे। वे एक शानदार खिलाड़ी भी रहे रहे। 1965 में उन्होंने अपने जीवन का पहला युद्ध भारत के खिलाफ लड़ा और इसके लिये उन्हें पाकिस्तान सरकार द्वारा वीरता का पुरस्कार भी दिया गया। उनके नेतृत्व में 1971 में हुए दूसरे भारत-पाकिस्तान युद्ध में पाकिस्तान को हार का मुंह देखना पड़ा। 1999 में करगिल युद्ध के दौरान भी पाकिस्तान को दुनिया के सामने शर्मिंदा होना पड़ा।
अक्तूबर 1998 में मुशर्रफ को जनरल का ओहदा मिला और वे सैन्य प्रमुख बन गए। 1999 में उन्होंने बिना खून बहाए तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पद से हटा कर सत्ता की बागडोर संभाल ली। इसके बाद 2002 में हुए पाकिस्तान के आम चुनावों में वे बहुमत से जीते।