पाकिस्तान ने एक बार फिर इस्लामिक सहयोग संगठन (ओआईसी) से भारत विरोधी राग अलापा है। पाकिस्तान ने भारत में मुसलमानों से भेदभाव का आरोप लगाते हुए ओआईसी से गुजारिश की है कि वह मुसलमानों के खिलाफ चल रही इन साजिशों की कड़ी निंदा करे कि भारत में कोरोना वायरस मुसलमानों की वजह से फैल रहा है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने ओआईसी और इससे जुड़े देशों को इस गंभीर मुद्दे पर साथ आने और मिलकर इसका विरोध करने की अपील की है। हालांकि भारत ने हमेशा पाकिस्तान के ऐसे आरोपों को बेबुनियाद और गलत करार दिया है।
कुरैशी ने कहा कि भारत में मुसलमानों के साथ हो रहे अमानवीय हमलों और इस्लामोफोबिया के नाम पर मुसलमानों के खिलाफ चलाए जा रहे नफरत के अभियान के खिलाफ मिलकर आवाज उठाने की जरूरत है। कुरैशी ने कहा है कि ओआईसी और तमाम देशों को एक होने की जरूरत है और हम चुप बैठकर कोविड-19 के बहाने फिर से गुजरात दंगों जैसी स्थिति नहीं पैदा होने दे सकते।
उनका आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेता और भारतीय मीडिया मिलकर मुसलमानों के खिलाफ सुनियोजित तरीके से नफरत का वायरस फैलाने में लगा है। कोरोना जेहाद और कोरोना आतंकवाद जैसे जुमले इस्तेमाल किए जा रहे हैं।
पाकिस्तान का आरोप है कि नफरत का यह सिलसिला तब से ज्यादा फैला है जब से तब्लीगी जमात के लोगों के साथ कोरोना वायरस को जोड़ा गया और यह वहम तेजी से फैलाया गया कि जमात से जुड़े लोगों की ही वजह से भारत में कोरोना फैला।
इससे भारत को 20 करोड़ मुसलमानों में जबरदस्त असुरक्षा की भावना भर गई है और वो खुद को समाज से कटा हुआ महसूस कर रहे हैं। आम मुसलमानों को रोजमर्रा की जिन्दगी में बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है और उनके कहीं आने जाने से लेकर, उनके व्यवसाय और कामकाज और यहां तक कि मेडिकल सुविधाओं पर भी सीधा असर दिख रहा है।
ये न सिर्फ भारतीय मुसलमानों के लिए बल्कि पूरे मुस्लिम समुदाय के लिए बेहद चिंता की बात है। हालांकि पाकिस्तान पहले भी ओआईसी के सामने ये अपील कर चुका है और भारत के खिलाफ अपनी बात कहता रहा है, लेकिन अबतक उसके अलावा, मलेशिया और तुर्की ने ही इस तरह की बात कही है।
संगठन के तमाम देशों के साथ भारत के रिश्ते अच्छे हैं और इस मामले में अभी पाकिस्तान अकेले ही अपनी बात उठाता नजर आ रहा है।