पाकिस्तान में कुछ समय पहले अलग-अलग इलाकों से राशन की दुकानों पर लूटमार और आटे को लेकर हुई लड़ाइयों की खबरें सामने आई थीं। ये सब इसलिए हुआ क्योंकि पाकिस्तान सरकार नगदी संकट और वहां की जनता आर्थिक तंगी का सामना कर रही है। लेकिन एक रिपोर्ट की मानें तो पाकिस्तान सरकार ने आगामी चुनाव कराने के लिए 42.528 अरब पाकिस्तानी रुपये (लगभग 149 मिलियन अमेरिकी डॉलर) की मंजूरी दी है।
पाकिस्तान चुनाव आयोग ने धन की मांग की थी
पाकिस्तान के वित्त मंत्री इशाक डार ने शुक्रवार को कैबिनेट के आर्थिक समन्वय (ईसीसी) की बैठक की अध्यक्षता की और इस अरबों के चुनावी बजट को मंजूरी दी। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) द्वारा चालू वित्तीय वर्ष में चुनाव के लिए धन की मांग करने के अनुरोध के बाद वित्त मंत्री ने यह निर्णय लिया।
ईसीपी ने ईसीसी को सूचित किया कि अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी के अनुसार, वह अगले आम चुनाव कराने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रही है और इस उद्देश्य के लिए, उसने पहले ही वित्त प्रभाग से धन के आवंटन के लिए अनुरोध किया है।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा है कि नेशनल असेंबली 12 अगस्त को अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेगी और आम चुनाव संविधान के अनुसार होंगे। पूर्व प्रधानमंत्री और विपक्षी नेता इमरान खान पिछले साल अप्रैल में सदन से बाहर होने के बाद से ही शीघ्र चुनाव की मांग कर रहे हैं। इसको लेकर कई बार इमरान समर्थकों ने सड़कों पर विरोध प्रदर्शन भी किए थे।
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था खराब स्थिति में
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था काफी समय से ढहने की कगार पर है। 2022 की बाढ़ , अन्य चीजों के अलावा रूस- यूक्रेन युद्ध के कारण हुए बाहरी आर्थिक झटकों ने इसे कगार पर ला दिया। नवंबर 2022 में, आईएमएफ ने 2019 ईएफएफ के तहत धन के वितरण को रोकने का फैसला किया। पाकिस्तान लगातार आईएमएफ के सामने गिड़गिड़ाया तब जाके आईएमएफ ने पाकिस्तान के तीन बिलियन अमेरिकी डॉलर के बेलआउट कार्यक्रम को अंतिम मंजूरी दे दी है।