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UK: बलूचिस्तान में उत्पीड़न के खिलाफ ब्रिटेन ने खींचा दुनिया का ध्यान, यूनिसॉन सम्मेलन में उठा मुद्दा

Sun, 21 Jun 2026 07:51 AM IST
अमन तिवारी अमर उजाला ब्यूरो

सार

पाकिस्तान में मानवाधिकारों के हनन और अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों की वैश्विक स्तर पर निंदा हो रही है। ब्रिटेन में बलूचिस्तान के हालातों पर चिंता जताई गई है।
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बलूचिस्तान में मानवाधिकार उल्लंघन पर घिरा पाकिस्तान - फोटो : ANI
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विस्तार
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भारत में बिगड़ते हालात पर दुनिया में आवाज उठाने वाला पाकिस्तान अपने ही देश में लोगों को जबरन गायब करने और हत्याओं को लेकर वैश्विक आलोचना का शिकार होता जा रहा है। ताजा मामलों के तहत बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्या समेत कब्जे वाले कश्मीर को लेकर उसे आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। ब्रिटेन में आयोजित सबसे बड़े सार्वजनिक क्षेत्र संघ (यूनिसॉन) ने एक कॉन्फ्रेंस में बलूचिस्तान के मानवाधिकारों के हालात पर सबका ध्यान खींचा।
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16 जून से जारी इस वार्षिक प्रतिनिधिमंडल सम्मेलन में ट्रेड यूनियन प्रतिनिधियों ने बलोच कार्यकर्ताओं को जबरदस्ती गायब करने, बिना कानूनी प्रक्रिया के हत्याओं, अभिव्यक्ति की आजादी पर पाबंदियों और बलोच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) के सदस्यों की हिरासत पर पाकिस्तान की आलोचना की। बलोच कार्यकर्ता ओमर करीम ने यह मुद्दा उठाया। कार्यक्रम में ब्रिटेन भर से आए करीब 1,000 प्रतिनिधियों और इतने ही ऑब्जर्वरों ने इन हालात को बेहद खतरनाक बताया।

ब्रिटेन में किया वैश्विक ध्यानाकर्षण
ब्रिटेन में जारी अभियान का मकसद दुर्व्यवहार की रिपोर्टों पर अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करना और जवाबदेही व न्याय के लिए समर्थन को बढ़ावा देना था। करीम ने दुनिया भर में ट्रेड यूनियनों, राजनीतिक संगठनों और मानवाधिकार मंचों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ने के लिए बलोच समुदाय के लोगों से आह्वान किया गया। कार्यक्रम में बलूचिस्तान, खैबर-पख्तूनख्वा और सिंध जैसे राज्यों में महिलाओं और बच्चों पर होने वाले उत्पीड़न की तरफ ध्यान खींचा गया।
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क्वेटा जेल में बंद बीवाईसी नेताओं के प्रदर्शन पर अफसरों की निंदा
बलोच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) के हिरासत में लिए गए नेताओं ने क्वेटा की हुडा जेल में लगातार छठे दिन अपना धरना जारी रखा। वे एक ऐसी न्यायिक प्रक्रिया को चुनौती दे रहे हैं जिसे वे अपारदर्शी मानते हैं। द बलूचिस्तान पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, यह विरोध अधिकारियों के उस फैसले के खिलाफ है जिसमें खुली अदालत के बजाय फेसलेस ट्रायल (बिना आमने-सामने की सुनवाई) के जरिये अदालती कार्यवाही की जा रही है। जेल के भीतर इस विरोध प्रदर्शन में बीवाईसी की मुख्य आयोजक महरंग बलोच, बीबो बलोच, गुलजादी और कई अन्य लोग शामिल हैं। ये सभी मार्च 2025 से हिरासत में हैं। इन लोगों ने ट्रायल के इस नए तरीके को मानने से इन्कार कर दिया है।

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बीवाईसी का तर्क है कि सार्वजनिक सुनवाई हर आरोपी का एक मौलिक सांविधानिक और कानूनी अधिकार है। एक वीडियो बयान में, महरंग बलोच की बहन ने कहा, बलूचिस्तान के प्रॉसिक्यूटर जनरल प्रांतीय गृह मंत्रालय का प्रतिनिधित्व कर रहे थे। इसके कुछ ही समय बाद कोर्ट ने कार्यवाही को वीडियो लिंक द्वारा फेसलेस फॉर्मेट में बदल दिया, जिसमें रोजाना सुनवाई होनी थी।
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सिख दंपती की हत्या पर पाकिस्तानी मानवाधिकार आयोग गंभीर
पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग (एचआरसीपी) ने मरदान में सिख दंपती की हत्या को गंभीरता से लिया है। आयोग ने इस घटना को देश भर में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और पूजा स्थलों की हिफाजत के लिए गंभीर चिंता का विषय बताया। मारे गए दोनों लोग मरदान के बाबू मोहल्ला में एक गुरुद्वारे की देखभाल करते थे, जहां एक हमले में उनकी मौत से अल्पसंख्यक अधिकार समर्थकों में भारी चिंता है। आयोग ने कहा, ये हत्याएं न केवल अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, बल्कि हमले से जुड़े हालात को लेकर भी गंभीर चिंताएं पैदा करती हैं। आयोग ने पुलिस के उन सार्वजनिक बयानों पर भी चिंता जताई, जिसमें शुरुआती दौर में ही इन हत्याओं को आपसी रंजिश का नतीजा बता दिया गया।
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