इस घटना के बाद अब इसकी निर्माण की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लग रहे हैं। पाकिस्तान में सिख समुदाय भी इससे काफी नाराज है। इनका कहना है कि इमरान खान सरकार में किसी अन्य मजहब को सम्मान नहीं मिलता। लोगों का आरोप है कि इमरान खान के लिए करतारपुर सिर्फ एक सियासी स्टंट था।
इस गुरुद्वारे का पुनरुद्धार दो साल पहले ही 2018 में हुआ था। इमरान सरकार ने यहां जोर-शोर से कार्यक्रम भी आयोजित करवाया था, लेकिन अब पता चला है कि निर्माण की गुणवत्ता कितनी खराब थी कि ये हल्के आंधी-तूफान को ही नहीं झेल सके। बताया जा रहा है कि ये कमजोर फाइबर के बने थे।