पाकिस्तान में इस समय डॉलर की कालाबाजारी का दौर है। जिनके पास भी ये मुद्रा है, वे मालामाल हो रहे हैं। लेकिन इससे देश वित्तीय संकट और गंभीर रूप ले रहा है। पाकिस्तान (Pakistan Economy) के विदेशी मुद्रा भंडार और वित्तीय बाजारों में डॉलर की अभूतपूर्व किल्लत हो गई है। इसकी कुछ वजह यह भी है कि बाजार में मुद्रा के बहुत सारे अनधिकृत डीलर उभर आए हैं और उन्होंने डॉलर की जमाखोरी कर ली है। ये लोग देश के काला बाजार और अफगानिस्तान जैसी जगहों पर सामान्य मूल्य से अधिक कीमत पर डॉलर की बिक्री कर रहे हैं। चोरी-छिपे डॉलर अफगानिस्तान ले जाने के एक नेटवर्क का खुलासा पाकिस्तान के सुरक्षा बलों ने किया है। उन्होंने अफगानिस्तान से लगी तोर्खम सीमा पर ऐसी खेप पकड़ी। उधर पेशावर के बाचा खान इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर छापामारी की दौरान अवैध डॉलरों की बरामदगी हुई।
कराची की निवेश कंपनी लेकसन इन्वेस्टमेंट के प्रमुख स्यावाश पाहोरे ने कहा- ‘देश में हर जगह डॉलर उपलब्ध है। बस बात यह है कि उसकी मुंहमांगी कीमत चुकाने वाला व्यक्ति उपलब्ध होना चाहिए।’ उन्होंने वेबसाइ निक्कईएशिया.कॉम से कहा- ‘ऐसा तब तक चलता रहेगा, जब तक बैंकों से मिलने वाले और खुले बाजार में मिल रहे डॉलर की कीमत में अंतर बना रहेगा।’
इस हफ्ते इंटर-बैंकिंग बाजार में एक डॉलर की कीमत 225.25 (पाकिस्तानी) रुपये थी। जबकि खुले बाजार में यह 233 रुपये में मिल रहा था। एक्सचेंज कंपनीज एसोसिएशन ऑफ पाकिस्तान के महासचिव जफर पारचा के मुताबिक इस समय देश में कारोबारियों की डॉलर की 90 फीसदी मांग जमाखोर और मुनाफाखोर पूरी कर रहे हैं। ये लोग खूब मुनाफा कमा रहे हैं।
वित्तीय बाजार से जुड़े लोगों के मुताबिक अफगानिस्तान ले जाकर डॉलर बेचने पर प्रति डॉलर 20 रुपये तक का मुनाफा हो रहा है। पारचा ने कहा- ‘सरकार अगर डॉलर की खरीद-बिक्री पर सीमाएं लगा देती है, तो लोग कानूनी रास्ता छोड़ कर ग्रे मार्केट में खरीद-बिक्री करने लगते हैं। लेकिन इस वजह से हमारे एसोसिएशन से जुड़ी कंपनियों के कारोबार में भारी गिरावट आई है।’ पारचा का इशारा सरकार की तरफ से बीते नौ दिसंबर को घोषित उपायों की तरफ था, जिसके तहत विदेशी मुद्रा बचाने के कदम उठाए गए।
पाकिस्तान के डिफॉल्ट करने (कर्ज चुकाने में अक्षम होने) का भय हाल में ज्यादा गहरा गया है। पाकिस्तान को इसी वित्तीय वर्ष में कर्ज और ब्याज की किस्तों के रूप में 13 बिलियन डॉलर चुकाने हैं। पाकिस्तान सरकार अपने मित्र देशों से इस अवधि में रियायत पाने की कोशिश कर रही है। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि अगर इसमें पर्याप्त सफलता नहीं मिली, तो फिर पाकिस्तान के सामने बड़ी मुश्किल खड़ी हो जाएगी।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ग्रे मार्केट में डॉलर का कारोबार बढ़ने के कारण देश की समस्या और गंभीर हो गई है। विदेशों में रहने वाले बहुत से पाकिस्तानी अपनी कमाई वैध माध्यम से भेजने के बजाय चोरी-छिपे भेज रहे हैं, ताकि उनके परिजन ग्रे मार्केट में उन्हें बेच कर अधिक मुनाफा कमा सकें।
इस बीच विदेशी मुद्रा बचाने के लिए उठाए गए कदम का कई क्षेत्रों पर बुरा असर हुआ है। पाकिस्तान मेडिकल एसोसिएशन ने चेतावनी जारी की है कि आयात घटने के कारण देश में दवाओं और अन्य चिकित्सा सामग्रियों का अभाव खड़ा हो सकता है।