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Pakistan Economy Crisis: देश के दिवालिया होने के अंदेशों में डूब-उतरा रहे हैं पाकिस्तान के लोग

Sat, 17 Dec 2022 03:21 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

Pakistan Economy Crisis: पूर्व वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल ने एक इंटरव्यू में कहा था कि जब तक आईएमएफ से कर्ज मिलने की शुरुआत नहीं होती है, पाकिस्तान के डिफॉल्ट करने का खतरा मंडराता रहेगा...
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Pakistan Economy Crisis: State Bank of Pakistan - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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पाकिस्तान (Pakistan Economy Crisis) के दिवालिया होने का अंदेशा लगातार गहराता जा रहा है। इसको लेकर देश में बेचैनी का माहौल है। सरकार की तरफ से दिए जा रहे लगातार आश्वासनों के बावजूद इस बारे में चर्चा थम नहीं रही है। वित्त मंत्री इशहाक डार और स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के गवर्नर के आश्वासनों से आशंका पर विराम नहीं लगा, बुधवार को प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को खुद मोर्चा संभालना पड़ा।

शरीफ ने देश के दिवालिया होने की चर्चाओं को अफवाह करार देते हुए संकल्प जताया कि उनकी सरकार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की तरफ से दिए रोडमैप का पालन करेगी। उन्होंने पहले वित्त मंत्री डार की तरफ से दिए गए इस आश्वासन को दोहराया कि पाकिस्तान अपनी कर्ज संबंधी देनदारियां पूरी करेगा और वह डिफॉल्ट (कर्ज चुकाने में खुद को अक्षम घोषित) नहीं करेगा।

आशंकाओं को ताजा हवा पूर्व वित्त मंत्री मिफ्ताह इस्माइल के एक बयान से मिली है। इस्माइल ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था कि जब तक आईएमएफ से कर्ज मिलने की शुरुआत नहीं होती है, पाकिस्तान के डिफॉल्ट करने का खतरा मंडराता रहेगा। उन्होंने इस ओर ध्यान खींचा कि अगर आईएमएफ ऋण देने की शुरुआत नहीं करता है, तो दूसरी अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएं भी पाकिस्तान को कर्ज नहीं देंगी। उस हालत में संभव है कि पाकिस्तान को डिफॉल्ट करना पड़े।

इशहाक डार ने ऐसी आशंकाओं खारिज करने की कोशिश में कहा था कि आईएमएफ पैकेज की नौंवी समीक्षा पूरी हो गई है और अगले जून तक के भुगतान के लिए ये संस्था तैयार है। एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सऊदी अरब से भी वित्तीय मदद हासिल करने की कोशिश में है। साथ ही सऊदी अरब को इस पर राजी करने की कोशिश की जा रही है कि वह अपने तेल निर्यात के बदले भुगतान के समय में पाकिस्तान को छूट दे।

डार के पहले स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के गवर्नर जमील अहमद ने इस हफ्ते के शुरू में कहा था कि पाकिस्तान अपने कर्ज की सभी किस्तें समय पर चुकाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई थी कि इस वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी होगी।

लेकिन ऐसे तमाम आश्वासनों से अटकलों का दौर नहीं थमा है। इसीलिए खुद प्रधानमंत्री ने आर्थिक मामले में महत्त्वपूर्ण वक्तव्य दिया है। लेकिन पर्यवेक्षकों के मुताबिक इससे भी चर्चाओं पर विराम लगने की संभावना नहीं है। ऐसा तब तक नहीं होगा, जब तक स्थिति में ठोस सुधार के लक्षण नहीं दिखेंगे। उसका सबसे प्रमुख संकेत आईएमएफ के कर्ज जारी करने से मिल सकता है। लेकिन इस दिशा में किसी प्रगति के संकेत नहीं हैं।

शहबाज शरीफ बुधवार को आर्थिक मसलों पर विचार-विमर्श के लिए उच्चस्तरीय बैठक बुलाई थी। उसमें वित्त, आर्थिक मामलों, और योजना विभाग के मंत्रियों, स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के गवर्नर, बैंकिंग क्षेत्र के बड़े अधिकारियों और वरिष्ठ सरकारी अफसरों ने भाग लिया। शरीफ ने उन्हें संबोधित करते हुए मौजूदा बदहाली के लिए पूर्व इमरान खान सरकार को दोषी ठहराया और दावा किया कि उनकी सरकार को अर्थव्यवस्था ‘बर्बाद हाल’ मिली थी।

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