पाकिस्तान में तेजी से बंद हो रहे उद्योग-धंधों के बीच सरकार ने पेट्रोलियम पदार्थों की सप्लाई सुधारने के उपायों की घोषणा की है। इसके तहत इन पदार्थों की जमाखोरी रोकने का इरादा जताया गया है। इसके पहले तेल कंपनियों की संस्था ऑयल कंपनीज एडवाइजरी काउंसिल (ओसीएसी) ने सरकार को चेतावनी पत्र भेजा था। इसमें कहा गया था कि कस्टम बॉन्डेड स्टोरेज सिस्टम के जरिए विदेशी कंपनियों से हो रहा आयात देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रहा है। इससे घरेलू तेल कंपनियों को भी भारी नुकसान हो रहा है। कुल नतीजा यह हो रहा है कि उद्योग-धंधे बंद हो रहे हैं।
ओसीएसी के अध्यक्ष वकार सिद्दिकी ने पेट्रोलियम मंत्री मुसादिक मलिक को यह पत्र भेजा था। उसके बाद ही मलिक ने नए कदम उठाने की घोषणा की। पत्र में कहा गया- ‘हमारी यह ठोस राय बनी है कि मौजूदा सिस्टम से देश में तेल की मुक्त आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित होगी, जिससे उद्योग क्षेत्र तबाह हो जाएगा।’ तेल कंपनियों के अधिकारियों ने मीडिया से कहा है कि सरकार ने यह सिस्टम विदेशी मुद्रा बचाने के मकसद से लागू किया है। लेकिन यह योजना सही समझ पर आधारित नहीं है।
विशेषज्ञों के मुताबिक पाकिस्तान की असल समस्या विदेशी मुद्रा भंडार में तेजी से आ रही गिरावट है। विदेशी मुद्रा बचाने के लिए पाकिस्तान सरकार बिना सबकी राय लिए कदम उठा रही है। जबकि इस कारण अर्थव्यवस्था के उत्पादक क्षेत्रों को भारी नुकसान हुआ है।
देश में बढ़ रही बेचैनी के बीच अब एक बार फिर शहबाज शरीफ सरकार ने उम्मीद जताई है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) पाकिस्तान को ऋण देने के लिए एक अस्थायी समझौते पर राजी हो जाएगा। आईएमएफ को उनकी मंशा के मुताबिक संकेत देने की कोशिश में सरकारी सूत्रों ने बुधवार को कहा कि देश में पेट्रोलियम पदार्थों पर अतिरिक्त कर लगाया जा सकता है। फिलहाल पेट्रोलियम डेवलमेंट लेवी प्रति लीटर 50 रुपये है, जिसे बढ़ा कर 55 रुपये किया जा सकता है। संभव है कि बढ़ा शुल्क एक जुलाई से लागू कर दिया जाए।
लेकिन पाकिस्तानी अखबारों में छपी रिपोर्टों में इस बात पर संदेह जताया गया है कि ऐसे कदमों के बावजूद आईएमएफ से पाकिस्तान को तुरंत ऋण मिल जाएगा। अखबार द न्यूज में विशेषज्ञों के हवाले से यह सवाल पूछा गया है कि क्या पाकिस्तान सरकार को आर्थिक एवं वित्तीय नीतियों के बारे में आईएमएफ से कोई सहमति पत्र मिला है? इसमें ध्यान दिलाया गया है कि बिना ऐसा सहमति पत्र मिले नए ऋण की उम्मीद रखना बेबुनियाद है।
पाकिस्तान सरकार के अधिकारियों ने द न्यूज को बताया है कि सरकार और आईएमएफ के बीच सहमति पत्र के दस्तावेजों का कई बार आदान-प्रदान हुआ है। लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि पाकिस्तान को ऋण देने के लिए जो पिछला समझौता हुआ था, उससे संबंधित नौवीं समीक्षा से आईएमएफ संतुष्ट हो गया है। आईएमएफ और पाकिस्तान के बीच मंगलवार को दोबारा बातचीत शुरू हुई थी। लेकिन उसमें बात कितनी आगे बढ़ी है, इस बारे में अभी कोई स्पष्ट संकेत नहीं हैं।