Pakistan Defence: कैसे साल-दर-साल अमेरिका से हटकर चीन पर निर्भर होता गया पाकिस्तान, कौन-कौन से हथियार खरीदे?
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Tue, 13 May 2025 08:02 PM IST
सार
पाकिस्तान का रक्षा क्षेत्र कैसे पूरी तरह चीन पर निर्भर हो चुका है? उसकी सेना के किस अंग के पास कौन से चीनी हथियार मौजूद हैं? वह और कौन से देशों से अपने हथियार आयात करता है? कैसे साल दर साल पाकिस्तान का रक्षा आयात अमेरिका से हटकर चीन तक पहुंच गया? आइये जानते हैं...
पाकिस्तान में बैठे आतंक के आकाओं के खिलाफ भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया और पहलगाम में हुआ आतंकवादी हमले का बदला ले लिया। हालांकि, इस पूरे परिदृश्य में पाकिस्तानी सेना भी कूद गई और उसने भारत पर हमला करने की कोशिश की। नतीजतन भारत ने न सिर्फ पाकिस्तान की सेना को मुहंतोड़ जवाब दिया, बल्कि उसकी तरफ से इस्तेमाल किए जाने वाले चीन-तुर्किये के हथियारों को भी बर्बाद कर दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे संघर्ष को पाकिस्तान ने अपने हथियार से नहीं, बल्कि अपने मददगार देश के हथियारों से लड़ा।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर पाकिस्तान का रक्षा क्षेत्र कैसे पूरी तरह चीन पर निर्भर हो चुका है? उसकी सेना के किस अंग के पास कौन से चीनी हथियार मौजूद हैं? वह और कौन से देशों से अपने हथियार आयात करता है? कैसे साल दर साल पाकिस्तान का रक्षा आयात अमेरिका से हटकर चीन तक पहुंच गया? आइये जानते हैं...
पाकिस्तान ने लगातार घटाया अमेरिका से रक्षा आयात।
- फोटो : अमर उजाला
पाकिस्तान में बैठे आतंक के आकाओं के खिलाफ भारत ने ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया और पहलगाम में हुआ आतंकवादी हमले का बदला ले लिया। हालांकि, इस पूरे परिदृश्य में पाकिस्तानी सेना भी कूद गई और उसने भारत पर हमला करने की कोशिश की। नतीजतन भारत ने न सिर्फ पाकिस्तान की सेना को मुहंतोड़ जवाब दिया, बल्कि उसकी तरफ से इस्तेमाल किए जाने वाले चीन-तुर्किये के हथियारों को भी बर्बाद कर दिया। चौंकाने वाली बात यह है कि इस पूरे संघर्ष को पाकिस्तान ने अपने हथियार से नहीं, बल्कि अपने मददगार देश के हथियारों से लड़ा।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर पाकिस्तान का रक्षा क्षेत्र कैसे पूरी तरह चीन पर निर्भर हो चुका है? उसकी सेना के किस अंग के पास कौन से चीनी हथियार मौजूद हैं? वह और कौन से देशों से अपने हथियार आयात करता है? कैसे साल दर साल पाकिस्तान का रक्षा आयात अमेरिका से हटकर चीन तक पहुंच गया? आइये जानते हैं...
दुनियाभर में रक्षा उत्पादों के आयात-निर्यात और इनके इस्तेमाल की निगरानी रखने वाली संस्था- स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के मुताबिक, 2020-2024 में पाकिस्तान दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा रक्षा आयातक देश था। 2020 से 2024 के बीच दुनियाभर में हुए रक्षा आयात में पाकिस्तान की 4.6 फीसदी हिस्सेदारी रही।
सिप्री के मुताबिक, 2015-19 से 2020-24 के बीच पाकिस्तान का हथियारों का आयात 61 फीसदी तक बढ़ गया। इनमें जंगी एयरक्राफ्ट्स से लेकर युद्धक पोतों का आयात शामिल है।
चौंकाने वाली बात यह है कि चीन यूं तो 1990 से ही पाकिस्तान का मुख्य सप्लायर रहा है, लेकिन बीच के समय में अमेरिका ने भी इस जगह को भरा है। हालांकि, 2011 के बाद से ही पाकिस्तान ने अपने रक्षा आयातों को अमेरिका से हटाया और चीन की तरफ ले गया।
पाकिस्तान ने कैसे अमेरिका से हटाकर चीन पर बढ़ाई रक्षा निर्भरता?
1. 2006-10
2006 से 2010 के बीच दुनियाभर में हथियारों के आयात में पाकिस्तान की हिस्सेदारी करीब पांच फीसदी रही। 2001-05 के मुकाबले पाकिस्तान का रक्षा आयात इस दौरान 128 फीसदी बढ़ गया। पाकिस्तान ने इसी दौरान अमेरिका से 18 एफ-16 एयरक्राफ्ट और चीन से 15 जेएफ-17 एयरक्राफ्ट खरीदे। इनके अलावा पाकिस्तान ने अमेरिका-चीन से इस दौरान हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और गाइडेड एंटी-रडार मिसाइलें खरीदीं।
2. 2011-15
2011 से 2015 के बीच चीन ने करीब 8.4 अरब डॉलर के हथियार बेचे। हालांकि, उसके कुल रक्षा निर्यात का 35 फीसदी अकेले पाकिस्तान ने खरीदा। इसके बाद बांग्लादेश (20 फीसदी) और म्यांमार (16 फीसदी) का नंबर आया। चीन ने इस दौर में पाकिस्तान को 8 सबमरीन देने का ऑर्डर भी लिया।
3. 2016-20
पाकिस्तान ने इस दौरान अपना हथियार आयात अमेरिका पर निर्भरता पूरी तरह खत्म करने की तरफ था। 2020 में आई सिप्री की रिपोर्ट में पाया गया कि जहां चीन ने इस दौरान पाकिस्तान को उसके कुल रक्षा आयात का 74 फीसदी भेजा है, वहीं दूसरे नंबर पर रूस और तीसरे पर इटली था। चीन ने इस दौरान तुर्किये से भी रक्षा समझौते किए और उसे 2028 तक 50 कॉम्बैट एयरक्राफ्ट, 8 सबमरीन, चार एयरक्राफ्ट चीन से, जबकि चार फ्रिगेट तुर्किये से मिलना तय हुआ।
4. 2020-24
2020-24 के दौर में पाकिस्तान दुनिया के पांच सबसे बड़े रक्षा आयातकों में से एक रहा। चीन इस दौरान वैश्विक निर्यातकों में 5.9 फीसदी निर्यात के साथ काफी ऊपर आ चुका था। हालांकि, उसके करीब 63 फीसदी रक्षा उत्पाद सिर्फ एक देश- पाकिस्तान को जा रहे थे। 1990-94 के बाद यह चीन की तरफ से पाकिस्तान को सबसे ज्यादा निर्यात था। इस दौरान पूरी दुनिया के रक्षा आयात में पाकिस्तान की हिस्सेदारी करीब 4.6 फीसदी रही।
चीन से कौन-कौन से हथियार आयात करता है पाकिस्तान?
पाकिस्तान की सेना चीन से कई आधुनिक हथियार आयात करती है। फिर चाहे थलसेना की बात हो, वायुसेना की या नौसेना की। पाकिस्तान ने चीन से टैंकों से लेकर उसके युद्धपोत और लड़ाकू विमान तक खरीदे हैं।
1. थलसेना
चीन से पाकिस्तान की रक्षा खरीद का एक बड़ा हिस्सा थलसेना को जाता है, जिसने टैंक से लेकर जमीन से हवा में मार करने की क्षमता वाली मिसाइलें तक खरीदी हैं। इन रक्षा आयात के जरिए पाकिस्तान न सिर्फ अपनी हवाई सुरक्षा सुनिश्चित होने का दावा करता है, बल्कि भारत को चुनौती देने की बात भी करता है। हालांकि, भारत के ऑपरेशन सिंदूर ने उसके इन दावों की पोल खोल कर रख दी।
(i). वीटी-4 युद्धक टैंक
पाकिस्तान ने बीते कुछ वर्षों में चीन से मुख्य युद्ध टैंकों की खरीद की है। उसका दावा है कि वह इनके जरिए भारत के टी-90 एमएस और अर्जुन टैंकों का सामना कर सकता है। पाकिस्तान में इन टैंकों को हैदर बुलाया जाता है। पाकिस्तान अब तक 176 ऐसे टैंक खरीद चुका है।
(ii). एसएच-15 तोपें
चीन की एसएच-15 तोपें असल में 155 मिमी गोले दागने की क्षमता वाला माउंटेड गन सिस्टम (एमजीएस) है। इन तोपों की खास बात यह है कि इन्हें ट्रक आधारित एक प्लेटफॉर्म पर लगाया जाता है, जिससे इन्हें लाने-ले जाने में आसानी होती है। पाकिस्तान के पास भारत से संघर्ष से पहले ऐसी 236 तोपें होने की बात सामने आई थी।
(iii). एचक्यू-9 और एचक्यू-16 एयर डिफेंस सिस्टम
पाकिस्तान ने चीन से एचक्यू-16 एयर डिफेंस सिस्टम भी खरीदा है। इसकी रेंज 40 किलोमीटर तक है और इसमें लगी मिसाइलें 15 किमी की ऊंचाई तक जा सकती हैं। पाकिस्तान ने 2017 तक ऐसे नौ एयर डिफेंस सिस्टम खरीदे हैं।
इसके अलावा पाकिस्तान के पास लंबी दूरी तक मार कर सकने वाले एचक्यू-9 एयर डिफेंस सिस्टम को भी खरीदा है। यह लंबी दूरी तक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों वाली प्रणाली है। एचक्यू-9 रक्षा प्रणाली में लगी मिसाइलों की रेंज 120 से 300 किमी तक है। यह सिस्टम आसमान में 50 किमी की ऊंचाई तक लक्ष्य भेद सकता है।
हालांकि, भारत ने जिस तरह एचक्यू-9 डिफेंस सिस्टम्स को तबाह किया, उसके बाद आधुनिक सिस्टम को लेकर काफी संशय की स्थिति है।
2. वायुसेना
चीन ने बीते कुछ वर्षों में पाकिस्तानी वायुसेना को न सिर्फ अपने कुछ आधुनिक फाइटर जेट्स बेचे हैं, बल्कि उसके साथ जेएफ-17 लड़ाकू विमान का साझा निर्माण भी किया है। इसके चलते पाकिस्तान ने अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों के एयरक्राफ्ट्स पर निर्भरता कम की है।
(i). जेएफ-17 थंडर
चीन ने पाकिस्तान को यह लड़ाकू विमान बेचने के बजाय उसके साथ बनाने का निर्णय लिया था। चीन के समर्थन से पाकिस्तानी वायुसेना ने 2022 में इस जेट की टुकड़ी को शामिल भी कर लिया। बताया गया है कि 2015-17 के बीच पाकिस्तान को जेएफ-17 ब्लॉक 2 वर्जन मिल चुके थे। इसके बाद उसने तकनीक को बदलते हुए ब्लॉक 3 वर्जन का निर्माण शुरू किया।
(ii). जेएफ-10सी 'फायरबर्ड'
चीन का यह एक इंजन वाला लड़ाकू विमान 4.5 पीढ़ी का एयरक्राफ्ट कहा जाता है। चीन के अलावा इसे सिर्फ पाकिस्तान की वायुसेना ही उड़ाती है। 2020 में पाकिस्तान ने 36 जे-10सीई वर्जन खरीदे थे। इसके साथ पाक ने 250 पीएल-15ई मिसाइलें भी खरीदीं। पहले छह विमान पाकिस्तान को 2022 में मिले।
बाद में चीन ने अपनी सप्लाई जारी रखी। बताया जाता है कि चीन का जे-10सी फ्रांस के मिराज सीरीज के लड़ाकू विमानों की तर्ज पर बना है। जे-10सी 500 किलो के छह लेजर गाइडेड बम ले जा सकता है। इसके अलावा 90 मिमी के अनगाइडेड रॉकेट और सीधे गिरने वाले बम भी रखता है। इसमें एक 23 मिमी की तोप भी है।
(iii). ड्रोन्स
चीन की तरफ से पाकिस्तान को खास तरह के ड्रोन्स भी मुहैया कराए गए हैं। इनमें प्रमुख सीएच-4 रेनबो और विंग लूंग-II हैं। पाकिस्तान का दावा है कि यह ड्रोन्स उसकी टोही और हमले की क्षमता को कई गुना बढ़ाते हैं। हालांकि, भारत के खिलाफ हमले में इस्तेमाल हुए ड्रोन्स का जो इस्तेमाल हुआ, उसके बाद चीनी ड्रोन्स की क्षमता पर भी सवाल उठने लगे हैं। अब तक यह साफ नहीं है कि पाकिस्तान ने तुर्किये के साथ चीन के कितने ड्रोन्स भारत की सीमा के पार भेजे।
(iv). काराकोरम ईगल एवैक्स
पाकिस्तानी वायुसेना का यह एयरक्राफ्ट युद्धक नहीं, बल्कि अपनी टोही क्षमताओं और दुश्मन की गतिविधियों का सही-सही आकलन करने के लिहाज से अहम है। पाकिस्तान ने 2015 से ही इस एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल शुरू कर दिया था। इस बीच कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा हुआ है कि जब भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया, तब उसने पाकिस्तान के एक एवैक्स को मार गिराया। इसके बारे में ज्यादा खुलासा होना अभी बाकी है।
3. नौसेना
पाकिस्तान की सेना के तीनों अंगों में अब तक नौसेना को सबसे कमजोर नब्ज कहा जाता रहा है। पीएनएस गाजी के करतबों की कहानी और भारत की तरफ से से उसे मार गिराए जाने की कहानी को छोड़ दें तो पाकिस्तानी नौसेना को काफी कमजोर माना जाता है। हालांकि, इस क्षेत्र में चीन ने बीते वर्षों में उसे सबमरीन से लेकर युद्धपोत तक मुहैया कराए हैं।
(i). तुगरिल क्लास फ्रिगेट
चीन ने पाकिस्तान को टाइप054ए/पी फ्रिगेट दी हैं, जो कि क्षेत्र में सबसे आधुनिक पोतों में से एक है। इसमें समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए 32 सेल्स वाला लॉन्चिंग सिस्टम है, जिसमें जमीन से हवा में मार करने की क्षमता वाली मिसाइलें, पोत-रोधी मिसाइलें, आधुनिक सेंसर और पनडुब्बी-रोधी हथियार भी लगे हैं। बताया जाता है कि चीन ने ऐसी चार फ्रिगेट 2021 से 2023 के बीच पाकिस्तान को मुहैया कराई हैं।
(ii). हंगोर क्लास पनडुब्बियां
चीन की युआन क्लास की पनडुब्बियां अपनी शांत रेकी और आधुनिक क्षमताओं के लिए जानी जाती है। इन पनडुब्बियों को चीन की खतरनाक टॉरपीडो मिसाइल और पाकिस्तान की बाबर-3 क्रूज मिसाइलों से लैस किया गया है, जो कि इन्हें परमाणु क्षमता वाली बनाती हैं। बताया जाता है कि चीन अब तक चार ऐसी पनडुब्बियां पाकिस्तान को सौंप चुका है और चार और पनडुब्बियां 2028 तक दी जा सकती हैं। पाकिस्तान इनके जरिए अरब सागर और समुद्र में ही चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) की रक्षा करने की कोशिश कर सकता है।
(iii). अजमत क्लास मिसाइलें
पाकिस्तान को चीन से अजमत-क्लास की फास्ट अटैक क्राफ्ट मिसाइलें भी मिली हैं। यह मुख्यतः एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें हैं, जिनकी मारक क्षमता 180 किमी तक है। पाकिस्तान के पास मौजूदा समय में ऐसी चार मिसाइलें हैं। हालांकि, ऐसी और कई मिसाइलों की खरीद के लिए दिलचस्पी दिखाई जा चुकी है।