पाकिस्तान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) को मनाने की एक नई कोशिश शुरू की है। उसने देश में किफायत बरतने की नीति लागू करने का फैसला किया है। इस नीति पर अमल के लिए 10 सदस्यों की समिति बनाई गई है। समिति को ये जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वह राजकोषीय खर्च घटाने के हर संभव उपाय को लागू करे। आईएमएफ ने पाकिस्तान को कर्ज की अगली किस्त देने के लिए जो शर्तें लगाई हैं, उनमें राजकोषीय घाटे को कम करना भी शामिल है।
आईएमएफ से अभी तक ऐसा कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला है, जिससे पाकिस्तान सरकार को जल्द उससे कर्ज मिलने की उम्मीद बंधे, लेकिन आईएमएफ के अलावा कोई दूसरा ऐसा जरिया नहीं है, जिससे पाकिस्तान विदेशी मुद्रा हासिल कर सके। विशेषज्ञों की राय है कि अगर पाकिस्तान को जल्द आईएमएफ से कर्ज नहीं मिला, तो अगले कुछ महीनों उसके कर्ज डिफॉल्ट करने (ना चुका पाने) की नौबत आ सकती है।
शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) सरकार जो किफायत कमेटी बनाई है, उसकी अध्यक्षता वित्त मंत्री करेंगे। इसके अलावा इसमें योजना मंत्री, संचार मंत्री, वाणिज्य मंत्री, समुद्री मामलों के मंत्री और वित्त राज्य मंत्री को भी रखा गया है। इन सभी मंत्रालयों के सचिवों को भी इसमें शामिल किया गया है। पर्यवेक्षकों के मुताबिक इस उच्चस्तरीय समिति के गठन से आईएमएफ को यह संदेश जाएगा कि पाकिस्तान सरकार खर्च घटाने को लेकर गंभीर है। लेकिन आम राय यह है कि जब तक इस बारे में ठोस प्रगति नहीं होती, आईएमएफ को सिर्फ सकारात्मक संदेश से प्रभावित करना मुमकिन नहीं होगा।
पिछले महीने पीडीएम सरकार सरकार ने खर्च में कटौती के कई उपायों का एलान किया था। उसमें बिजली की खपत पर नियंत्रण भी शामिल है। इसके अलावा सरकारी अधिकारियों की विदेश यात्रा पर रोक लगा दी गई है। सरकारी विभागों को ईंधन की खपत में 40 प्रतिशत कटौती करने का आदेश दिया गया है। अखबार डॉन में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक इन तमाम उपायों पर अमल की देखरेख खुद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ कर रहे हैं, लेकिन एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक वित्त मंत्रालय इस निष्कर्ष पर है कि अब तक घोषित उपायों से आईएमएफ की शर्तों को पूरा करना संभव नहीं होगा। इसलिए सरकारी धन के विवेकपूर्ण उपयोग और राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए और अधिक सख्त उपायों की जरूरत है। वित्त मंत्रालय ने अपना ये आकलन सात जुलाई को पेश किया। इसके तहत वित्त मंत्रालय ने सरकारी विभागों को हर प्रकार के नए वाहनों की खरीदारी पर रोक लगाने का आदेश दिया है। सभी मंत्रालयों के अंदर नए पद पर नियुक्ति पर रोक लगा दी गई है।
पर्यवेक्षकों का कहना है कि खर्च घटाने की मुहिम का असर विकास कार्यों पर पड़ेगा। इसके अलावा सरकार कुछ ऐसे भी कदम उठा सकती है, जिसका बोझ आम जनता पर पड़े। बीते लगभग डेढ़ महीनों में वह पेट्रोल का दाम सौ रुपये प्रति लीटर से ज्यादा बढ़ा चुकी है। जानकारों के मुताबिक इन कदमों के बाद भी आईएमएफ संतुष्ट होगा, यह तय नहीं है। आईएमएफ की एक खास चिंता पाकिस्तान में बढ़ रही राजनीतिक अस्थिरता भी है। इसका कोई हल शरीफ सरकार के पास नहीं है।