फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pakistan Crisis: वह दिन दूर नहीं जब श्रीलंका जैसे होंगे पाक के हालात, एक डॉलर की कीमत हुई 234 पाकिस्तानी रुपये

सार

Pakistan Crisis: आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ डॉक्टर एसएन राय कहते हैं कि जिस तरीके से पूरी दुनिया में अमेरिकी डॉलर मजबूत हो रहा है उससे लचर अर्थव्यवस्था वाले देशों की हालत और ज्यादा खराब हो गई है। इस वक्त पाकिस्तान (Pakistan) को एक डॉलर खरीदने के लिए 233 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। जबकि पिछले साल पाकिस्तान को एक डॉलर खरीदने के लिए 149 रुपये ही खर्च करने पड़ते थे...
विज्ञापन
Pakistan Crisis: पाकिस्तान और चीन - फोटो : Agency (File Photo)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जो हालात इस वक्त श्रीलंका के हैं उन्हीं रास्तों पर पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान भी चल पड़ा है। पाकिस्तान इस वक्त अलग-अलग योजनाओं में अरबों डॉलर की वित्तीय मदद लेकर चीन के चंगुल में इतना जकड़ा कि उसे बाहर निकलने में दुनिया के और दूसरे मुल्कों के सामने हाथ फैलाने पड़ रहे हैं। पाकिस्तान के हालात ऐसे हो गए हैं कि उसका वित्तीय घाटा उसकी बर्बादी की कहानी लिखने लगा है। विदेशी मामलों के जानकारों का मानना है कि चीन ने अपने जाल में फंसा कर छोटे-छोटे देशों को न सिर्फ बर्बाद करने के लिए छोड़ दिया है, बल्कि ऐसी कुटिल चालों के चलते अपना उपनिवेश भी बढ़ाने की तैयारी कर दी है।

तेजी से घट रहा है विदेशी मुद्रा भंडार

दरअसल पाकिस्तान की लड़खड़ाई हुई वित्तीय व्यवस्था पर सबसे ज्यादा चर्चा तब शुरू हुई, जब पाकिस्तान के मंत्री एहसान इकबाल ने संसदीय कमेटी के सामने कहा कि देश का विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से घट रहा है। इसी के साथ पाकिस्तान के वित्तीय सलाहकारों ने आपात बैठक बुलाई। विदेशी मामलों के जानकार और दिल्ली विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर अभिषेक सिंह कहते हैं कि पाकिस्तान चीन के चंगुल में फंसकर अपना विदेशी मुद्रा भंडार खोता जा रहा है। वे कहते हैं कि आंकड़ों के मुताबिक बीते एक साल में पाकिस्तान ने तकरीबन 10 अरब डालर से ज्यादा का विदेशी मुद्रा भंडार खो दिया है। यही वजह है कि 2022 में पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार महज 10 अरब डॉलर का ही बचा है। विदेश मामलों के जानकारों का कहना है कि सिर्फ पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार ही कम नहीं हुआ है, बल्कि पाकिस्तान के ऊपर कर्ज भी लगातार बढ़ता जा रहा है। पाकिस्तानी इकोनॉमिक एडवाइजरी फोरम के आंकड़ों के मुताबिक उनके देश पर 2021 में जो कर्ज 85.57 अरब डॉलर का था वह एक साल के भीतर बढ़कर 28.79 अरब डॉलर पहुंच गया है। अभिषेक सिंह कहते हैं कि ऐसी दशा में किसी देश की प्रगति तो दूर की बात है वह खुद को बर्बाद होने से भी नहीं रोक सकता।

पाकिस्तान ने अरबों डॉलर का कर्ज लिया

विदेश मामलों के जानकारों का कहना है कि जिस तरीके के आर्थिक हालात पाकिस्तान में बने हैं वह श्रीलंका से कम नहीं है। अभिषेक सिंह कहते हैं कि चीन ने पाकिस्तान की आर्थिक बर्बादी की कहानी लिखनी तब शुरू की, जब उसने पाकिस्तान में अपना बड़ा निवेशकरना शुरू किया। इसमें सबसे बड़ा निवेश तब शुरू हुआ, जब चीन ने पाकिस्तान के भीतर न सिर्फ हाईवे बनाने शुरू किए बल्कि वहां के और कई बड़े प्रोजेक्ट में हाथ डालना शुरू किया। इसके अलावा चीन से लेकर ग्वादर बंदरगाह तक बनने वाली सड़क के लिए अरबों डालर का निवेश करने की शुरुआत की। पाकिस्तान को तमाम तरह के सब्जबाग दिखाकर चीन ने पाकिस्तान को अरबों डॉलर का कर्ज दिया। इसके अलावा पाकिस्तान ने चीन से अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कमर्शियल करार के तहत भारी कर्ज लिया। पाकिस्तान ने बीते कुछ सालों में आईएमएफ समेत कई मुस्लिम देशों से भी बड़ा कर्जा ले चुका है।

रूस-यूक्रेन युद्ध बड़ी वजह

पाकिस्तान मामलों के जानकार रिपुदमन बनर्जी कहते हैं कि बिगड़ते हालातों को देखते हुए ही पाकिस्तान के मंत्री एहसान इकबाल ने अपने देश की जनता से चाय कम पीने की अपील कर डाली थी। बनर्जी कहते हैं कि पाकिस्तान सिर्फ चाय ही नहीं बल्कि कई और विदेशी उत्पाद जो लग्जरी श्रेणी में आते हैं, उनकी कई सौ करोड़ डालर की सालाना खरीद करता है। इसके अलावा पाकिस्तान के ऊपर जब उसे कर्ज चुकाने का दबाव पड़ने लगा, तो पाकिस्तान सरकार लगातार विदेशी मुद्रा की ऊंची कीमतों पर खरीद कर रही है। आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ डॉक्टर एसएन राय कहते हैं कि पाकिस्तान ने अपना कर्ज चुकाने के लिए विदेशी मुद्रा तो लेनी शुरू कर दी, लेकिन उनका अपना व्यापार लगातार घट रहा है। यह व्यापारिक घाटा कोविड और उसके बाद लगातार चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते बना हुआ है। उनका कहना है कि ऐसे हालात में दुनिया की बड़ी-बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश खुद को संभाल पाने में असहज महसूस कर रहे हैं तो पाकिस्तान जैसी लचर कमजोर और बदहाल अर्थव्यवस्था वाले देशों का हाल क्या होगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। राय के मुताबिक जिस तरीके से श्रीलंका अपनी आर्थिक बदहाली के चलते बर्बाद हो चुका है। वैसे ही पाकिस्तान की हालत भी कुछ उसी राह पर चल रही है।

233 पाकिस्तानी रुपये में एक डॉलर

वे कहते हैं कि जिस तरीके से पूरी दुनिया में अमेरिकी डॉलर मजबूत हो रहा है उससे लचर अर्थव्यवस्था वाले देशों की हालत और ज्यादा खराब हो गई है। इस वक्त पाकिस्तान को एक डॉलर खरीदने के लिए 233 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। जबकि पिछले साल पाकिस्तान को एक डॉलर खरीदने के लिए 149 रुपये ही खर्च करने पड़ते थे। बिगड़ते हालात में श्रीलंका में भी यही दशा हुई। श्रीलंका में इस वक्त एक अमेरिकी डालर को खरीदने के लिए 355 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। वह कहते हैं कि जब पूरा व्यापार और कर्जे का लेन-देन इसी करेंसी में होता है, तो आप पाकिस्तान जैसे लचर और बदहाल हो रही अर्थव्यवस्था वाले देश का भविष्य सोच सकते हैं कि आने वाले दिनों में क्या होने वाला है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें