उच्च न्यायालय ने 23 जून को सुरक्षित रख लिया था फैसला
सत्र अदालत के फैसले के खिलाफ पीटीआई प्रमुख खान ने उच्च न्यायालय का रुख किया था, जिसने आपराधिक कार्रवाई पर आठ जून तक रोक लगा दी थी। फिर से सुनवाई शुरू होने के बाद न्यायमूर्ति आमिर फारूक ने 23 जून को याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था और कहा था कि वह ईद-उल-अजहा के बाद मामले को देखेंगे।
न्यायमूर्ति फारूक को पीठ से अलग करने की याचिका
इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश फारूक ने मंगलवार को पूर्व प्रधानमंत्री की ओर से दायर याचिका पर फैसला सुनाया, जिसमें तोशाखाना मुकदमे की कार्यवाही को चुनौती दी गई थी। 'डॉन' अखबार की खबर के अनुसार पीटीआई प्रमुख ने एक दिन पहले ही न्यायमूर्ति फारूक को पीठ से अलग करने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी।
तोशाखाना मामले को लेकर इमरान को दिया गया था अयोग्य करार
तोशाखाना, कैबिनेट डिवीजन के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत एक विभाग है, जो शासकों, सांसदों, नौकरशाहों और अधिकारियों को अन्य सरकारों और राज्यों के प्रमुखों और विदेशी गणमान्य व्यक्तियों द्वारा दिए गए कीमती उपहारों को संग्रहीत करता है। क्रिकेटर से नेता बने इमरान को मिले सरकारी तोहफों की बिक्री को लेकर तोशाखाना राष्ट्रीय राजनीति में उस समय बड़ा मुद्दा बन गया था जब पाकिस्तान के चुनाव आयोग (ईसीपी) ने पूर्व प्रधानमंत्री को 'झूठे बयान और गलत घोषणा' करने के लिए अयोग्य करार दिया था।
इमरान के खिलाफ चल रहे 140 से ज्यादा मुकदमे
इमरान खान देशभर में 140 से अधिक मुकदमों का सामना कर रहे हैं। इनमें आतंकवाद, हिंसा, ईशनिंदा, भ्रष्टाचार और हत्या जैसे आरोप भी शामिल हैं। खान पर 2018 से 2022 तक अपने प्रधानमंत्री पद का दुरुपयोग करते हुए सरकारी उपहारों की खरीद और बिक्री करने का आरोप है, जिनकी कीमत 140 मिलियन रुपये (635,000 अमेरिकी डॉलर) से अधिक है।
गिलगित बाल्तिस्तान की कोर्ट ने मुख्यमंत्री को अयोग्य करार दिया
गिलगित बाल्तिस्तान की एक स्थानीय कोर्ट ने कानून की फर्जी डिग्री से संबंधित मामले में क्षेत्र के मुख्यमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के वरिष्ठ नेता खालिद खुर्शीद खान को मंगलवार को अयोग्य करार दे दिया। इसे पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पीटीआई के लिए एक नया झटका माना जा रहा है। खालिद पर फर्जी डिग्री के आधार पर गिलगित-बाल्तिस्तान बार काउंसिल से वकालत का लाइसेंस लेने का आरोप था।