पाकिस्तान में 26वां संविधान संशोधन विधेयक विवादों में है। विधेयक को सीनेट की मंजूरी मिल चुकी है। अब इसे नेशनल असेंबली में पेश किया है। संशोधन को पारित कराने के लिए सरकार को शासितों को 336 सदस्यीय नेशनल असेंबली में 224 वोटों की आवश्यकता है। संसद में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अगुवाई वाली गठबंधन सरकार को 213 सांसदों का समर्थन हासिल है। बता दें कि इस संशोधन का लक्ष्य पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट में न्यायधिशों कार्यकाल को तीन साल करना है। विपक्षी दलों और कई खबरों के अनुसार संवैधानिक संशोधन का उद्देश्य स्वतंत्र न्यायपालिका की शक्ति को कमजोर करना है।
तरार ने संसद में पेश किया बिल
कैबिनेट से अनुमोदन मिलने के बाद विधेयक को कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने संसद में पेश किया। उन्होंने कहा कि मैं पाकिस्तान इस्लामी गणराज्य के संविधान में और संशोधन करने के लिए 26वां संविधान संशोधन विधेयक 2024 पेश करना चाहता हूं। इस पर सीनेट के अध्यक्ष यूसुफ रजा गिलानी ने सदन से पूछा कि क्या इसका विरोध है? इस पर उन्हें सीनेट सदस्यों से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
अली जफर ने की तीखी आलोचना
पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के नेता अली जफर ने सीनेट में बिल पर सबसे पहले बात की। उन्होंने तीखी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के सांसदों को बिल के पक्ष में वोट देने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी के सीनेटर अनुपस्थित थे क्योंकि उन्हें डर था कि सरकार के पक्ष में वोट देने के लिए उन्हें अगवा कर लिया जाएगा।
इसके साथ ही उन्होंने सीनेट में बोलते हुए कहा यह कानून और नैतिकता के खिलाफ है कि संशोधन को मंजूरी दिलाने के लिए दबाव डाला जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने सीनेट के चेयरमैन से यह भी आग्रह किया कि अगर पीटीआई के किसी सीनेटर ने सीनेट में वोट किया है तो उसके वोट की गिनती न की जाए।
सीनेट अध्यक्ष ने घोषित किया परिणाम
जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल के पांच सदस्यों और बलूचिस्तान नेशनल पार्टी एम के दो सांसदों ने भी विधेयक के पक्ष में मतदान किया। इसके बाद सीनेट अध्यक्ष गिलानी ने परिणाम की घोषणा करते हुए कहा कि पैंसठ सदस्य विधेयक के संबंध में प्रस्ताव के पक्ष में हैं और चार सदस्य विधेयक का विरोध करते हैं। इसलिए विधेयक पारित हो गया है।
12 सदस्यीय आयोग का गठन
वहीं इस मामले में विधेयक के तहत मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए 12 सदस्यीय आयोग का गठन किया गया है। इसके बाद न्यायाधीश को तीन साल के लिए नियुक्त किया जाएगा। बिल अब नेशनल असेंबली में जाएगा, जहां इसे दो-तिहाई बहुमत की जरूरत है। इसके बाद विधेयक संविधान का हिस्सा बनने के लिए राष्ट्रपति की मंजूरी चाहिए होगी।
बता दें कि इससे पहले दिन में कैबिनेट ने गठबंधन सहयोगियों से आम सहमति लेने के बाद प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की अध्यक्षता में एक बैठक के दौरान विधेयक के प्रस्तावित मसौदे को मंजूरी दी। इससे पहले प्रधानमंत्री शहबाज ने प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन पर विस्तृत चर्चा के लिए राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से मुलाकात की। इस दौरान राष्ट्रपति को विधेयक के बारे में जानकारी दी गई।