पाकिस्तान के थारपारकर जिले में पिछले साल दुष्कर्म की शिकार 17 वर्षीय हिंदू लड़की की इस साल अक्तूबर में हुई मौत को लेकर दक्षिण एशियाई मानवाधिकार समूह ने निंदा की है। संगठन ने पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों के धर्मांतरण और अल्पसंख्यकों पर होने वाले हमले तुरंत रोकने की मांग पाकिस्तान सरकार से की है।
साउथ एशिया कलेक्टिव्स (एसएसी) ने हाल ही में जारी दक्षिण एशिया अल्पसंख्यक रिपोर्ट 2020 में अल्पसंख्यकों के कम होने के तथ्य उजागर किए हैं। इसके मुताबिक, पाकिस्तान को चाहिए कि वह नागरिकों के सार्वजनिक जीवन पर आक्रामक हमले रोके। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के हालात बेहद चिंताजनक हैं और इससे मानवाधिकार के रक्षकों तथा मुक्त विचारकों के लिए पाक में खतरा बढ़ रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में हिंसा और धर्मांतरण की शिकार होने वाली अधिकांश लड़कियां कृषि भूमि पर जमींदारों के लिए काम करने वाले बंधुआ मजदूरों की हैं। पाकिस्तान के सिंध और पंजाब प्रांत में अपहर्ता युवक शादी को पवित्र करने के लिए शरिया कानून का इस्तेमाल करते हैं। इनका शिकार होने वाली अधिकांश लड़कियां हिंदू या ईसाई धर्म से जुड़ी होती हैं।
तुर्की की फर्मों ने पाक सरकार से कहा, ‘माफी मांगें’
पाकिस्तान के साथ दोस्ती का वादा निभाने वाले तुर्की की फर्मों ने पाक सरकार से कहा है कि वह दंगा पुलिस द्वारा उनकी सुविधाओं पर हमला करने को लेकर माफी मांगे। इन फर्मों में अलबायरक और ओजपाक समूह शामिल हैं। कंपनियों के कर्मचारियों के मुताबिक, पाक दंगा पुलिस ने लाहौर में दो कंपनियों के छह गैरेज पर गलत ढंग से छापा मारने की कार्रवाई की।