पाकिस्तान में मदरसों को चलाने वाले मौलवियों का कोई केंद्रीय निकाय नहीं है। साथ ही मौलवियों द्वारा दुर्व्यवहार के आरोपों की जांच या उन पर प्रतिक्रिया देने के लिए कोई केंद्रीय प्राधिकरण भी मौजूद नहीं है।
प्रधानमंत्री इमरान खान की सरकार ने पाठ्यक्रम को आधुनिक बनाने और मदरसों को और अधिक जवाबदेह बनाने का वादा किया है, लेकिन इस पर बहुत कम काम हुआ है। पुलिस का कहना है कि मौलवियों द्वारा बच्चों के यौन शोषण की समस्या बहुत व्यापक है। उनका कहना है कि पुलिस में जितनी रिपोर्ट दर्ज करवाई जाती है, वह बहुत कम है। अधिकतर इस तरह की घटनाओं की रिपोर्ट ही दर्ज नहीं करवाई जाती है।
इस्लाम की निंदा का आरोप लगाकर अपराध छिपाते मौलवी
फिर भी दर्जनों रिपोर्टों के बावजूद किसी ने भी एक मौलवी को दोषी नहीं ठहराया। धार्मिक मौलवी पाकिस्तान में एक शक्तिशाली समूह हैं और जब उनमें से एक के खिलाफ दुर्व्यवहार के आरोप लगाए जाते हैं तो वे संगठित होकर इसके खिलाफ खड़े हो जाते हैं। वे पीड़ितों पर इस्लाम की निंदा या मानहानि का आरोप लगाकर अपने अपराध को छिपाने में सफल हो जाते हैं।
पाकिस्तान में मौलवियों के खिलाफ इस तरह के अपराध का मामला दर्ज करवाने वाले परिवारों पर दबाव बनाया जाता है कि वह मौलवी को माफ कर दें। परिवारों के बीच इस बात का भी डर होता है कि उनके बच्चों को यौन उत्पीड़न के इस कलंक के साथ सारी जिंदगी गुजारनी होगी। इस कारण बहुत से परिवार दर्ज मामलों को वापस ले लेते हैं। जब एक परिवार मौलवी को माफ कर देता है तो जांच समाप्त हो जाती है क्योंकि आरोप हटा दिए जाते हैं।