पाकिस्तान दो बड़ी ताकतों की भू-राजनीतिक होड़ में उलझता चला जा रहा है। ऐसा लगता है कि अमेरिका और चीन ने अपने बीच गहराते टकराव में पाकिस्तान को जोर-आजमाईश का मैदान बना लिया है।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) अपनी इस शर्त पर अड़ा हुआ है कि जब तक चीन पाकिस्तान को कर्ज राहत नहीं देता, वह पाकिस्तान के मंजूर 6.5 बिलियन डॉलर के ऋण की किस्तें जारी करना शुरू नहीं करेगा। समझा जाता है कि आईएमएफ का रुख आम तौर पर अमेरिका की मंशा से तय होता है। उधर अब चीन आरोप लगाया है कि पाकिस्तान जैसे विकसित देशों की वित्तीय मुश्किलों के लिए पश्चिमी देशों की नीतियां जिम्मेदार हैं।
चीन के ताजा बयान से पाकिस्तान सरकार को निराशा हुई है। इससे साफ हो गया है कि आईएमएफ की शर्त के मुताबिक उसके लिए चीन को ऋण चुकाने की समय-सारणी फिर से तय करने के लिए राजी करना मुश्किल है। इससे आईएमएफ का कर्ज मिलने की संभावना और दूर हो सकती है, जिससे पाकिस्तान डिफॉल्ट करने के और करीब पहुंच जाएगा।
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने गुरुवार को कहा- ‘इस बात का अवश्य उल्लेख होना चाहिए कि कुछ विकसित देशों की वित्तीय नीतियां पाकिस्तान सहित अनेक विकासशील देशों की वित्तीय कठिनाइयों का मुख्य कारण हैं।’ बीजिंग में अपनी प्रेस ब्रीफिंग के दौरान उन्होंने कहा कि पश्चिमी नेतृत्व वाले व्यापारिक कर्जदाता और बहुपक्षीय वित्तीय संस्थान इन विकसित देशों के मुख्य कर्जदाता हैं। उन्होंने कहा- ‘इसलिए चीन अनुरोध करता है कि पाकिस्तान के आर्थिक और सामाजिक विकास में सभी पक्ष रचनात्मक भूमिका निभाएं।’
इस बीच पाकिस्तान सरकार ने आईएमएफ की शर्तों के मुताबिक कई और सख्त कदम उठाए हैं। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (एसबीपी) ने बुधवार को एक झटके में ब्याज दर में तीन फीसदी की बढ़ोतरी कर दी। इस तरह अब पाकिस्तान में ब्याज दर 20 फीसदी हो गई है। देश में 1996 के बाद कभी ब्याज दर इतनी ऊंची नहीं रही। एसबीपी ने कहा कि महंगाई दर पर नियंत्रण के लिए यह कठोर कदम उठाया गया है।
पाकिस्तान में इस समय मुद्रास्फीति की वार्षिक दर 31.7 फीसदी है। फरवरी में खाद्य और पेट्रोलियम को छोड़ कर अन्य क्षेत्रों की मुद्रास्फीति दर शहरों में 17.1 और ग्रामीण इलाकों में 21.5 फीसदी दर्ज की गई। विश्लेषकों के मुताबिक ब्याज दर में भारी बढ़ोतरी से मुद्रास्फीति दर में कुछ गिरावट आ सकती है, लेकिन इससे देश का आर्थिक विकास बुरी तरह प्रभावित होगा।
आईएमएफ ने महंगाई दर पर काबू पाने और राजकोषीय सेहत दुरुस्त करने की शर्त लगा रखी है। शहबाज शरीफ सरकार ने राजकोषीय सेहत ठीक करन के लिए हाल में कई कदम उठाए हैं, जिनमें बिक्री कर और उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी, ऊर्जा की कीमतों में इजाफा और सरकार खर्च घटाने के कदम शामिल हैं। सरकार को उम्मीद है कि इन कदमों से उसका घाटा कम होगा।
लेकिन विश्लेषकों को अंदेशा है कि इन कदमों के बावजूद आईएमएफ से ऋण की किस्तें मिलना दूर बना रह सकता है। उन्होंने ध्यान दिलाया है कि पिछले महीने चीन ने पाकिस्तान को 70 करोड़ डॉलर की वित्तीय मदद दी, लेकिन उसने आईएमएफ की शर्तों के मुताबिक रियायत नहीं दी। ऐसे में आईएमएफ के रुख में नरमी की उम्मीद ज्यादा मजबूत नहीं है।