पाकिस्तान में हाल के दिनों में पत्रकारों पर बढ़ रहे हमलों से परेशान होकर मीर ने कहा था कि जो लोग भी पत्रकारों पर हमले करने के जिम्मेदार हैं, उनकी पहचान उजागर की जा सकती है। इस बयान के बाद उनपर प्रतिबंध लगा दिया गया था और उनकी नौकरी भी चली गई थी।
मशहूर पाकिस्तानी पत्रकार और एंकर हामिद मीर ने पाकिस्तानी सेना के दबाव के आगे झुकते हुए अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगी। दरअसल, एक पत्रकार पर हमले के बाद सेना पर की गई अपनी कड़ी टिप्पणी के लिए उन पर प्रतिबंध लगा दिया गया था और उनकी नौकरी भी चली गई थी।
मीर ने देश के सैन्य प्रतिष्ठान की आलोचना करने वाले मीडियाकर्मियों पर होने वाले सिलसिलेवार हमलों के मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की थी। उनके 28 मई के भाषण के बाद 30 मई को उनकी सेवाएं रोक दी गई थीं। रावलपिंडी इस्लामाबाद यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स, नेशनल प्रेस क्लब और मीर द्वारा गठित समिति ने मंगलवार को जारी संयुक्त बयान में कहा कि उनका सेना को अपमानित करने का कोई इरादा नहीं था और वह तहेदिल से एक संस्था के रूप में सेना की इज्जत करते हैं।
दो हफ्ते पहले हुआ था पत्रकार पर हमला
क्या कहा था हामिद मीर ने?
पाकिस्तान में हाल के दिनों में पत्रकारों पर बढ़े इस तरह के हमलों से परेशान होकर मीर ने कहा था कि जो लोग भी पत्रकारों पर हमले करने के जिम्मेदार हैं, उनकी पहचान उजागर की जा सकती है। इसके साथ ही उन्होंने अपने भाषण में कई बार पाकिस्तानी सेना की मिलीभगत को लेकर बहुत से शब्दों का जिक्र किया था। इस दौरान उन्होंने सैन्य प्रमुख कमर जावेद बाजवा का नाम लिया था। उन्होंने कहा था कि अगर आप हमारे घर में हम पर हमला करने के लिए घुस रहे हैं, तो ठीक है। हम आपके घर नहीं आ सकते क्योंकि आपके पास तो टैंक और बंदूके हैं, लेकिन हम आपके घरों में होने वाली चीजों को सार्वजनिक कर सकते हैं।