सार
पाकिस्तान की शहबाज सरकार अब इस्लामाबाद में इस्राइल विरोधी प्रदर्शन को सख्ती से रोकने में जुटी है। इसके तहत प्रशासन ने इस्लामाबाद के मुख्य रास्ते बंद कर दिए और मोबाइल इंटरनेट सेवा अनिश्चितकाल के लिए बंद की। रावलपिंडी में धारा 144 लागू कर प्रदर्शन, जुलूस और सभाओं पर रोक लगाई गई है।
पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में गाजा के समर्थन और इस्राइल के विरोध में हो रहे धार्मिक संगठन तेहरिक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) का विरोध प्रदर्शन दिन-प्रतिदिन और भयावह होता जा रहा है। ऐसे में प्रदर्शन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए और इसे रोकने के लिए प्रशासन ने शुक्रवार को राजधानी इस्लामाबाद के मुख्य रास्ते बंद कर दिए और मोबाइल इंटरनेट सेवा भी निलंबित कर दी। बता दें कि टीएलपी ने गाजा में हुई हत्याओं के खिलाफ मार्च की घोषणा की थी, जो क्षेत्र में शांति समझौते के बीच हो रहा था।
बता दें कि आंतरिक मंत्रालय ने मुख्य रास्तों पर कंटेनर लगाकर रास्ता बंद कर दिया और पाकिस्तान दूरसंचार प्राधिकरण (पीटीए) को मोबाइल इंटरनेट बंद करने का आदेश दिया। यह सेवा मध्यरात्रि से अनिश्चितकाल के लिए बंद रहेगी।
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शहर के अंदर-बाहर के रास्ते बंद
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने शहर के अंदर और बाहर के रास्ते बंद किए हैं और प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए दंगाइयों के खिलाफ तैयारियां कर रखी हैं। इतना ही नहीं रावलपिंडी में धारा 144 भी लागू कर दी गई है, जिसके तहत शहर में सभी प्रकार के प्रदर्शन, जुलूस और सभा पर रोक लगी है।
अमेरिकी दूतावास ने प्रदर्शनों को लेकर चेतावनी जारी की
वहीं इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास और लाहौर, कराची व पेशावर स्थित अमेरिकी महावाणिज्य दूतावासों ने खबर दी है कि 10 अक्टूबर 2025 को पाकिस्तान में कई जगह विरोध प्रदर्शन हो सकते हैं। इन प्रदर्शनों के कारण सड़कों पर बंदिशें या मार्ग परिवर्तन होने की संभावना है। दूतावासों ने अमेरिकी नागरिकों से सलाह दी है कि वे बड़े समूहों से दूर रहें और अपनी सुरक्षा पर विशेष ध्यान रखें।
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इस्लामाबाद में रेड जोन पूरी तरह सील
टीएलपी का मुख्यालय लाहौर में छापा मारा गया और उसके नेता को गिरफ्तार करने की कोशिश की गई, जिससे हिंसक झड़पें हुईं। इस्लामाबाद में ‘रेड जोन’ पूरी तरह से सील कर दिया गया है, जहां महत्वपूर्ण सरकारी और दूतावास कार्यालय हैं। गौरतलब है कि टीएलपी मुसलमानों का कट्टर संगठन है, जिसने 2017 में संसद सदस्यों के शपथ-पत्र के मुद्दे पर सफल प्रदर्शन कर सरकार को अपनी नीतियां वापस लेने पर मजबूर किया था।