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Pakistan audio leak: पाकिस्तान में ऑडियो लीक कांड से घिरे इमरान का नया दांव, अब कोर्ट में देंगे अर्जी

Tue, 11 Oct 2022 03:39 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

Pakistan audio leak: इमरान खान ने सोमवार को कहा कि इस मामले की ‘प्रामाणिक जांच’ कराने की गुजारिश करते हुए वे अदालत में अर्जी दाखिल करेंगे। उन्होंने कहा कि ऑडियो लीक होने से प्रधानमंत्री कार्यालय और आवास की पूरी सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है...
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Pakistan audio leak: Imran Khan - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पाकिस्तान में ऑडियो टेप लीक मामले में सरकार की तरफ से घोषित जांच से असंतुष्ट पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने इस मामले में कोर्ट की पनाह लेने का फैसला किया है। बीते दो हफ्तों में ऐसे कई ऑडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं, जिन्हें पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय और आवास से लीक हुआ बताया गया है। इन ऑडियो क्लिप्स से सत्ता पक्ष के नेताओं और इमरान खान दोनों की इमेज पर कलंक लगा है। शहबाज शरीफ सरकार इस लीक कांड की पूरी जांच कराने का आदेश दे चुकी है।

मगर इमरान खान ने सोमवार को कहा कि इस मामले की ‘प्रामाणिक जांच’ कराने की गुजारिश करते हुए वे अदालत में अर्जी दाखिल करेंगे। उन्होंने कहा कि ऑडियो लीक होने से प्रधानमंत्री कार्यालय और आवास की पूरी सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई है। उन्होंने एक ट्विट में कहा- ‘मेरे प्रधानमंत्री रहते हुए मेरे आवास की जासूसी की गई। हम कोर्ट जाकर गुजारिश करेंगे इन लीक हुए ऑडियो की प्रामाणिकता की जांच कराई जाए और उसके बात इस बात की जांच कराई जाए कि किसी खुफिया एजेंसी ने बातचीत रिकॉर्ड की और कौन ऑडियो क्लिप्स को लीक रहा है, जिनमें से कई क्लिप संपादित या ऐसे लगते हैं जिनमें हेरफेर की गई है।’

शुरुआत में लीक हुए ऑडियो में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, उनकी भतीजी मरियम नवाज और अन्य सत्ताधारी नेताओं और सरकारी अधिकारियों की आवाज सुनी गई थी। इनमें मरियम नवाज को अनुचित फायदा दिलवाने की बातचीत भी सुनी गई। लेकिन इसके बाद ऐसे कई क्लिप वायरल हुए, जिनमें इमरान खान अमेरिका से आए कूटनीतिक संदेश को तोड़-मरोड़ कर पेश करने और किसी भी हद तक जाकर अपनी सरकार बचाने की योजना बनाते सुने गए। बताया गया है कि ये क्लिप उस समय के हैं, जब तत्कालीन इमरान खान सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया था।

प्रधानमंत्री शरीफ ने इस कांड की तह में जाने के लिए पिछले हफ्ते 12 सदस्यों की एक उच्चस्तरीय जांच समिति बनाई थी। समिति में सत्ताधारी गठबंधन में शामिल सभी दलों के नुमाइंदों को रखा गया है। साथ ही इसमें खुफिया एजेंसियों- आईएसआई, आईबी, फेडरल इन्वेस्टिगेटिव एजेंसी आदि के बड़े अफसरों को भी शामिल किया गया है। लेकिन इसमें विपक्ष के नुमाइंदे शामिल नहीं हैं। इसलिए इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ को यह इल्जाम लगाने का मौका मिला है कि ये जांच समिति इस कांड की निष्पक्ष जांच नहीं करेगी।

इस बीच पीटीआई को पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी के एक बयान से झटका लगा है। अल्वी को पीटीआई सरकार के समय ही राष्ट्रपति बनाया गया था। इमरान खान के सत्ता से हटने के बाद उन पर इल्जाम रहा है कि वे निष्पक्षता को त्याग कर अपनी पार्टी के हितों में काम कर रहे हैं। लेकिन अब उन्होंने इमरान खान की सरकार को सत्ता से हटाने के पीछे अमेरिकी साजिश के नैरेटिव पर सवाल उठा दिया है। अल्वी ने एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा- ‘मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस मामले की जांच कराने की जरूरत है। लेकिन मैं इस बात से सहमत नहीं हूं कि कोई साजिश रची गई।’

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