कुलभूषण जाधव मामले में अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) ने पाकिस्तान को तगड़ा झटका देते हुए सुनवाई स्थगित करने की उसकी मांग को सिरे से खारिज कर दिया। पाकिस्तान ने मंगलवार को अपना पक्ष रखते हुए उसके तदर्थ जज तस्सदुक हुसैन जिलानी की गैर मौजूदगी में सुनवाई स्थगित करने की मांग की थी। हुसैन को सोमवार को दिल का दौरा पड़ा था।
पाकिस्तान का पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल अनवर मंसूर खान ने सुनवाई की शुरुआत में कहा, 'हमने अपने अधिकारों को लागू किया है जो हमें एक तदर्थ जज नियुक्त करने का हक देता है। चूंकि इस समय हमारे जज का होना बेहद जरूरी है।
मंसूर खान ने कहा, 'आईसीजे में भारत याचिका इसका उदाहरण है कि भारत पाकिस्तान को नीचा दिखाने के लिए पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल करता है। मैं खुद भी भारत की क्रूरता शिकार हुआ हूं। युवा सैन्य अफसर के तौर पर मैं भारत में युद्ध बंदी के तौर पर रह चुका हूं। भारत ने हमेशा जेनेवा कन्वेंशन का उल्लंघन किया है। 2014 में पेशावर स्कूल में हुए हमले में 140 बच्चों को खो दिया। इस हमले को भारत ने अफगानिस्तान के जरिये अंजाम दिया था।
भारत की दलीलों के जवाब में पाकिस्तान ने कहा कि भारतीय नौसेना का अधिकारी कारोबारी नहीं, बल्कि जासूस था। पाक के वकील खावर कुरैशी ने कहा, 'मुझे यह कहते हुए खेद है कि भारत ने कार्यवाही के दौरान विश्वास की कमी दिखाई।
मजबूत विश्वास अंतरराष्ट्रीय कानून का हिस्सा है। भारत ने इस मामले को राजनीतिक मंच के तौर पर इस्तेमाल किया है। जाधव भारत की आतंक की आधिकारिक नीति का एक मोहरा था। जाधव बहुत से स्थानीय लोगों के संपर्क में था। उसने कई को राज्य विरोधी ताकतों को आत्मघाती हमलावर बनने के लिए तैयार किया था ताकि पाकिस्तान में आतंक फैलाया जा सके।
भारत की ओर से वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे और दीपक मित्तल बुधवार को फिर से आईसीजे में पक्ष रखेंगे। चार दिन चलने वाली सुनवाई के पहले दिन सोमवार को साल्वे ने आईसीजे से कुलभूषण जाधव की मौत की सजा को रद्द करने और तत्काल रिहाई का अनुरोध किया था। भारत ने कहा कि सैन्य अदालत का फैसला 'हास्यास्पद मामलेÓ पर आधारित है, जो वाजिब प्रक्रिया के न्यूनतम मानकों को भी पूरा नहीं करता है।