Pakistan Airlines: पीआईए और उसके इंजीनियरों के बीच विवाद ने पाकिस्तान की उड़ान सेवाओं को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। इसके कारण लाहौर एयरपोर्ट पर पाकिस्तान की एथलीट की टीम को रियाद जाने में छह घंटे से अधिक की देरी का सामना करना पड़ा। इंजीनियर और पीआईए दोनों ने एक दूसरे पर आरोप लगाए है।
पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस यानी पीआईए में इंजीनियरों के साथ लंबे समय से चल रहे विवाद ने देश की उड़ान सेवाओं को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है। इसी विवाद के बीच इस्लामिक सॉलिडेरिटी गेम्स में हिस्सा लेने जा रही पाकिस्तान की एथलेटिक्स टीम शुक्रवार को लाहौर एयरपोर्ट पर छह घंटे से अधिक समय तक फंसी रही। टीम में ओलंपिक गोल्ड मेडलिस्ट अरशद नदीम और उनके कोच सलमान बट भी शामिल हैं।
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एथलीटों की टीम सुबह छह बजे लाहौर एयरपोर्ट पहुंची थी, लेकिन पीआईए की रियाद जाने वाली फ्लाइट 9.25 बजे उड़ान भरने के बजाय छह घंटे से अधिक देरी से चल रही थी। सलमान बट ने बताया कि देर का कारण ‘तकनीकी समस्या’ बताया गया, लेकिन वास्तविक वजह इंजीनियरों और पीआईए प्रबंधन के बीच जारी तकरार है, जिसके चलते उड़ानें बार-बार प्रभावित हो रही हैं।
पीआईए प्रबंधन में विवाद गहराया
एसएईपी से जुड़े इंजीनियर पिछले कई सप्ताह से एयरवर्थीनेस सर्टिफिकेट जारी नहीं कर रहे हैं, जिससे कई विमान ग्राउंडेड हो गए। इससे घरेलू और अंतरराष्ट्रीय रूटों पर बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द या प्रभावित हुई हैं। इंजीनियरों की नाराजगी वेतन वृद्धि, बेहतर सुविधाओं और पुर्जों की समय पर उपलब्धता को लेकर है। वहीं, पीआईए प्रबंधन का कहना है कि इंजीनियर एसेनशियल सर्विसेज ऐक्ट का उल्लंघन कर रहे हैं।
एयरलाइन ने दिया सफाई बयान
पीआई का दावा है कि उड़ान रद्द होने या देरी का कारण ‘शेड्यूल रेशनलाइजेशन’ और सामान्य परिचालन कारण हैं। लेकिन पिछले एक महीने से जारी व्यवधानों ने साफ कर दिया है कि इंजीनियरों के साथ संघर्ष ही असली वजह है। लाहौर, कराची और इस्लामाबाद एयरपोर्ट पर शुक्रवार को भी कई उड़ानें रद्द और कई घंटों की देरी से प्रभावित हुईं।
पीआईए पर निजीकरण का दबाव
पीआईए पहले से ही भारी कर्ज और वित्तीय संकट में है। इसी महीने 20 वर्षों में पहली बार मुनाफा दर्ज करने के बावजूद सरकार एयरलाइन के निजीकरण की दिशा में आगे बढ़ रही है। पीआईए ने एसएईपी पर निजीकरण को ‘नुकसान पहुंचाने की कोशिश’ का आरोप लगाया है, जबकि इंजीनियरों का कहना है कि वे काम पर हैं, लेकिन बिना पूर्ण जांच के विमान क्लियरेंस देना संभव नहीं है।