भारत के साथ बढ़ेगा तनाव
असीम मुनीर खासतौर पर भारत विरोधी आतंकियों के संरक्षण के लिए कुख्यात हैं। उनके ही संरक्षण में भारत से लगती पाकिस्तानी सीमा पर जगह-जगह आतंकी लॉन्च पैड बनाए गए। मुनीर के ट्रैक रिकॉर्ड को देखें, तो साफ हो जाता है कि पाकिस्तान और भारत के बीच तनाव बढ़ेगा। जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में तैनात पाकिस्तानी सेना की ट्रिपल एक्स और उत्तरी कमान के प्रमुख के तौर पर मुनीर ने लंबा वक्त भारत की सीमा के पास बिताया है। भारत से नफरत पाकिस्तानी सेना प्रमुख के व्यक्तित्व की प्रमुख जरूरत है। लिहाजा, मुनीर भी इसका अपवाद नहीं होंगे और उसके पाकिस्तानी सेना के प्रमुख बन जाने से सीमा पर कोई बदलाव नहीं आने वाला। बल्कि, भारत को और भी ज्यादा सजग होने की जरूरत है।
लंबे समय बाद वरिष्ठता के आधार पर नियुक्ति...
पाकिस्तान में शरीफ खानदान की पार्टी पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज) की सरकार अब तक हर बार पसंद के हिसाब से सेना प्रमुख नियुक्त करती रही है। यह पहली बार है, जब वरिष्ठता के आधार पर सेना प्रमुख नियुक्त किया गया है। इस तरह से सरकार और सेना दोनों तरफ से एक-दूसरे के मामलों में दखलंदाजी कम करने का संकल्प जताया है। सेवानिवृत्त हो रहे सेना प्रमुख जनरल बाजवा ने बुधवार को अपने विदाई भाषण में भी इस मुद्दे पर कहा, सेना 70 साल से सरकार में दखल देती आ रही है। अब यह नहीं चलेगा, लेकिन नेताओं को भी अपनी जुबान पर लगाम लगाकर सेना का सम्मान करना सीखना होगा।
पाकिस्तान में भी बढ़ेगा टकराव
माना जा रहा है कि इमरान मुनीर को सेना प्रमुख बनाए जाने के खिलाफ मोर्चा खोल सकते हैं, क्योंकि मुनीर से उनके व्यक्तिगत संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। लिहाजा, मुनीर की नियुक्ति को सियासी रंग देकर इमरान पहले ही 26 नवंबर को फौज के शहर रावलपिंडी में रैली का ऐलान कर चुके हैं। इमरान पहले से ही आरोप लगाते आ रहे हैं कि सरकार किसी ऐसे अधिकारी को सेना प्रमुख बनाएगी, जो उन्हें और उनकी पार्टी को पाकिस्तान के राजनीतिक मैदान से पूरी तरह से मिटा दे।
इसी वजह से इमरान सेना प्रमुख की नियुक्ति से पहले चुनावों का एलान करने की जिद कर रहे थे। दूसरी तरफ सरकार और फौज इसलिए परेशान है, क्योंकि इमरान की वजह से सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का पाकिस्तान दौरा रद्द हो चुका है। खान की पार्टी ने बुधवार को दावा किया कि 26 नवंबर को होने वाली रैली ऐसी होगी, जैसी पाकिस्तान के इतिहास में कभी नहीं हुई होगी। इमरान के लॉन्ग मार्च में अब तक एक महिला जर्नलिस्ट समेत 3 लोग मारे जा चुके हैं।