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पाकिस्तान: तक्षशिला के पास खोदाई में मिला भारत का प्राचीन इतिहास, दुर्लभ सिक्कों और पत्थरों में सभ्यता की झलक

Sat, 03 Jan 2026 06:57 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

पाकिस्तान के पुरातत्वविदों ने तक्षशिला के पास प्राचीन भीर टीले में ईसा पूर्व छठी शताब्दी के लैपिस लाजुली सजावटी पत्थर और दूसरी शताब्दी के कुषाण काल के कांस्य सिक्के खोजे। सिक्कों पर सम्राट वासुदेव की छवि अंकित मिली, जो क्षेत्र पर उनके शासन का प्रमाण देती है।

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तक्षशिला के पास खोजी गई दुर्लभ वस्तुएं - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पाकिस्तान के पुरातत्वविदों को ऐतिहासिक तक्षशिला शहर के पास यूनेस्को-सूचीबद्ध स्थल की खोदाई के दौरान दुर्लभ सजावटी पत्थर और सिक्के मिले हैं। इससे भारत की प्राचीन सभ्यता की सबसे प्रारंभिक शहरी बस्ती की एक दुर्लभ झलक मिली है। पुरातात्विक महत्व की ये वस्तुएं प्राचीन भीर टीले पर मिली हैं। विशेषज्ञों ने ईसा पूर्व छठी शताब्दी के सजावटी पत्थर और दूसरी शताब्दी के सिक्के बरामद किए। अधिकारियों ने इसे यहां हुई सबसे अहम खोज बताया है।

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समाचार पत्र डॉन ने अपनी एक खबर में कहा कि विशेषज्ञों ने जिन सजावटी पत्थरों के टुकड़े बरामद किए उनकी पहचान ‘लैपिस लाजुली’ के रूप में की गई है। इसके साथ ही कुषाण वंश से संबंधित दुर्लभ कांस्य सिक्के भी मिले हैं, जिससे प्राचीन गांधार के भौतिक इतिहास को एक नया आयाम मिला है। पंजाब पुरातत्व विभाग के उप निदेशक आसिम डोगर ने कलाकृतियों के प्रारंभिक विश्लेषण की पुष्टि की। डोगर उत्खनन दल के प्रमुख हैं। उन्होंने कहा, सजावटी पत्थर लैपिस लाजुली हैं जो एक बहुमूल्य पत्थर है, जबकि सिक्के कुषाण काल के हैं।

सिक्कों पर सम्राट वासुदेव की छवि भी मिली
उत्खनन दल ने धात-कलाकृतियों की आयु निर्धारित करने के लिए विशेष फॉरेंसिक मदद ली। पंजाब पुरातत्व विभाग के मुताबिक, पेशावर विवि के विशेषज्ञों द्वारा किए गए मुद्रा विश्लेषण से पुष्टि हुई है कि सिक्कों पर सम्राट वासुदेव की छवि अंकित है। इतिहासकार वासुदेव को इस क्षेत्र पर शासन करने वाला अंतिम ‘कुषाण शासक’ मानते हैं।
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स्तूपों, मठों, धर्मस्थलों का निर्माण
पुरातत्वविद् आसिम डोगर ने कहा,  कनिष्क शासनकाल में बौद्ध धर्म को कुषाण काल का व्यापक संरक्षण मिलने के कारण स्तूपों, मठों और विशाल धार्मिक परिसरों का निर्माण हुआ। प्रसिद्ध मुद्राशास्त्री मलिक ताहिर सुलेमान ने कहा, कुषाणकालीन सिक्के प्राचीन दक्षिण व मध्य एशिया को समझने के लिए सबसे अहम ऐतिहासिक स्रोतों में से एक हैं।

कुषाण काल में सियासी आर्थिक और सांस्कृतिक प्रभाव अपने चरम पर था
आसिम डोगर ने कहा कि आसपास के पुरातात्विक साक्ष्यों से पता चलता है कि ये अवशेष आवासीय क्षेत्र थे। ये नवीनतम खोजें इस बात की पुष्टि करती हैं कि 2,000 साल पहले कुषाण शासन के दौरान तक्षशिला अपने राजनीतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक प्रभाव के चरम पर था। डोगर ने कहा, कनिष्क जैसे सम्राटों के शासनकाल में तक्षशिला एक प्रमुख प्रशासनिक, वाणिज्यिक और बौद्धिक केंद्र के रूप में उभरा। इससे पहले भी तक्षशिला एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्ययन केंद्र रहा है।

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