पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच एक बार फिर हालात बेहद खराब हो गए हैं। पाकिस्तान ने इस्लामाबाद के खिलाफ खुली जंग का एलान कर दिया है। इससे पहले अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर जवाबी हमले किए। इसके कुछ ही घंटों के बाद पाकिस्तानी सेना ने काबुल और कंधार पर हमले किए।
तालिबान शासन का कहना है कि उसने ये हमले रविवार को पाकिस्तान की ओर से हुए हमलों के जवाब में किए हैं। उस समय पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने रविवार को हमलों में 70 चरमपंथियों को मार गिराया है। हालांकि, अफगानिस्तान के पाकिस्तान के दावों को खारिज किया। उसने कहा कि पाकिस्तानी हमलों में महिलाओं-बच्चों समेत दर्जनों आम लोग मारे गए थे।
पाकिस्तान ने अफगान तालिबान पर तहरीक-ए-तालिबान (टीटीपी) को समर्थन देने का आरोप लगाया है। टीटीपी को पाकिस्तान तालिबान के नाम से भी जाना जाता है। 20 साल बाद जब अमेरिकी सैनिकों ने 2021 में अफगानिस्तान से वापसी की थी, तब पाकिस्तान उसे बधाई देने वाले देशों में से एक थे। तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान ने यहां तक कहा था कि अफगानिस्तान ने गुलामी की जंजीरों को तोड़ दिया है।
अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद पाकिस्तान ने दी थी बधाई
विश्लेषकों का कहा है कि पाकिस्तान इस स्थिति को स्पष्ट तौर पर गलत समझा। पाकिस्तान को लग रहा था कि वह अफगानिस्तान पर अपना नियंत्रण रख सकेगा और अपने इशारे पर उसका इस्तेमाल करेगा। हालांकि, हकीकत इससे अलग निकली। तालिबान को पाकिस्तान के इशारे पर चलना मंजूर नहीं था। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद पाकिस्तान ने 'बड़े भाई' जैसा रवैया दिखाया। पाकिस्तान ने यह तय करने की कोशिश की कि अफगानिस्तान को क्या करना चाहिए।
एक अधिकारी ने कहा कि तालिबान और पाकिस्तान के बीच कई मुद्दे हैं। अपने मुद्दों को सीधे तौर पर सुलझाने के बजाय, पाकिस्तान ने भारत पर तालिबान का साथ देने का आरोप लगाया। वहीं, भारत ने पाकिस्तान के इस आरोप से सिरे से इनकार किया है और कहा है कि पाकिस्तान को अपनी अंदरूनी समस्याओं की जिम्मेदारी दूसरों पर थोपने की आदत है।
डूरंड रेखा पर हालात कितने गंभीर हैं?
पाकिस्तान ने पहले भी आरोप लगाया था कि तालिबान टीटीपी के आतंकवादियों को शरण दे रहा है और अफगानिस्तान की जमीन से पाकिस्तान पर हमले की अनुमति दे रहा है। कुछ महीनों में पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर भारी तनाव देखने को मिला है। डूरंड रेखा पर फिदायीन हमले, हवाई हमले और जमीन पर संघर्ष देखने को मिले हैं।
वहीं, तालिबान ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया है कि वह पड़ोसियों के साथ उसके संबंधों को कमजोर करने की कोशिश करता है। एक अन्य अधिकारी ने पहले ही उम्मीद जताई थी कि पाकिस्तान, भारत के साथ तालिबान के संबंधों का हवाला देकर अफगानिस्तान में हमलों को जायज ठहराएगा।
पाकिस्तान को क्यों नागवार गुजर रहे भारत-अफगानिस्तान संबंध?
पाकिस्तान ने तालिबान पर भारत की गोद में बैठने का आरोप लगाया है। भारत हमेशा अफगानिस्तान के नागरिकों के लिए मदद का हाथ बढ़ाता रहा है। जब अफगानिस्तान में 6.3 तीव्रता का भूकंप आया था, तो भारत ने सबसे पहले मदद भेजी थी। भारत ने बल्ख और समांगन इलाकों में 15 टन खाद्य सामग्री भेजी थी। इसके अलावा, भारत ने मेडिकल आपूर्ति भी दी थी।
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भारत और अफगानिस्तान के संबंध पाकिस्तान की आंखों को हमेशा से चुभते रहे हैं। यही कारण है कि पाकिस्तान हमेशा से ही अपने इलाके में होने वाली किसी भी अप्रिय गतिविधि के लिए भारत और तालिबान को जिम्मेदार ठहराता रहा है। इस्लामाबाद ने बिना सबूत के झूठी कहानी गढ़ता है कि टीटीपी अफगान की जमीन से काम करता है। उसने यह भी कहा है कि भारत इस संगठन का समर्थन कर रहा है। तालिबान और भारत, दोनों ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया।
इस्लामाबाद, अफगानिस्तान में भारत की बढ़ती मौजूदगी को बहुत ही संदेह की नजरों से देखता है। अफगानिस्तान के विदेश मंत्री पिछले साल भारत आए थे। दोनों देशों के बीच यह तय हुआ था कि भारत काबुल में अपना दूतावास फिर से खोलेगा। विश्लेषकों का कहना है कि यह कोई हैरानी की बात नहीं है कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के साथ संघर्ष में भारत को घसीटा है। भारत-अफगान के संबंध बेशक इस्लामाबाद के लिए एक परेशानी हैं। पाकिस्तान अपने लोगों के सामने इस लड़ाई को सही ठहराने की कोशिश कर रहा है, जिनका सरकार और सेना पर भरोसा अब तक के सबसे निचले स्तर पर है।
इनपुट: आईएएनएस
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