Pakistan-Afghanistan Clash: Chaman Border
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पाकिस्तान और अफगानिस्तान (Pakistan-Afghanistan Clash) के रिश्तों में इस महीने तेजी से गिरावट आई है। पाकिस्तान से लगी सीमा पर लगातार हो रहे आतंकवादी हमलों के कारण अफगानिस्तान में सत्ताधारी तालिबान और पाकिस्तान सरकार के बीच टकराव बढ़ता जा रहा है। पिछले हफ्ते चमन सीमा पर अफगानिस्तान की तरफ से हुई गोलाबारी में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दर्जनों नागरिक घायल हो गए थे। पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत की राजधानी क्वेटा से चमन सीमा तकरीबन 100 किलोमीटर दूर है। इसके पहले 11 दिसंबर को उसी इलाके में अफगानिस्तान की तरफ से हुई गोलाबारी में सात नागरिक मारे गए थे।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने दावा किया है कि पाकिस्तानी बलों ने गोलाबारी की घटनाओं का मुंहतोड़ जबाव दिया, जिसमें अफगानिस्तान के आठ से नौ सैनिक मारे गए। लेकिन अफगानिस्तान ने इसकी पुष्टि नहीं की है। इन घटनाओं से खफा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बीते सप्ताहांत एक बयान में कहा- “अफगानिस्तान की अंतरिम सरकार” को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी घटनाएं फिर ना हों।
पाकिस्तान के सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक पाकिस्तान की अभी तक कोशिश किसी तरह तनाव को काबू में रखने की है। उनके मुताबिक देश के अंदर बढ़ रहे राजनीतिक और आर्थिक संकट के कारण पाकिस्तान सरकार नहीं चाहती कि विवाद ज्यादा भड़के।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक पाकिस्तान के सैनिकों के सीमा पर मरम्मत कार्य में शामिल होने को लेकर विवाद शुरू हुआ। तालिबान सैनिकों ने नागरिक इलाकों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। पाकिस्तान में उग्रवाद के विशेषज्ञ फखर काकाखेल ने कहा है कि असैनिकों को निशाना बनाने की घटनाओं से जाहिर है कि तालिबान अभी तक जिहादी सोच से बाहर नहीं निकले हैं। वे अपने को एक संगठित और अनुशासित सुरक्षा बल में तब्दील नहीं कर पाए हैं।
तालिबान नेतृत्व के एक निकट सूत्र ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से बातचीत में कहा कि तालिबान लड़ाकों ने जिस तरह लड़ते हुए जिंदगी गुजारी है, उसके बीच उनसे यह उम्मीद करना ठीक नहीं है कि वे “बातचीत से मसले का हल निकालेंगे”। उस सूत्र ने कहा- ‘तालिबान अब चाहते हैं कि उनसे समानता के स्तर पर व्यवहार किया जाए। पाकिस्तान उन्हें अपना दास ना समझे। पाकिस्तान के ऐसे ही नजरिए के कारण तालिबान लड़ाकों में गुस्सा भड़कता है और उनकी हिंसक प्रतिक्रिया सामने आती है।’
जबकि पाकिस्तान के अधिकारियों का कहना है कि काबुल स्थित तालिबान शासन पाकिस्तान की सुरक्षा चिंताओं पर ध्यान नहीं दे रहा है। काबुल में पाकिस्तानी दूतावास पर हुआ हमला इस बात की मिसाल है। उन्होंने बताया कि काबुल स्थित अपने राजनयिकों की रक्षा के लिए पाकिस्तान ने तालिबान से 40 सुरक्षाकर्मियों को वीजा देने की गुजारिश की थी। लेकिन तालिबान ने सिर्फ दस सुरक्षाकर्मियों को वीजा दिया।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच विवाद का एक बड़ा मुद्दा आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) है, जिसने हाल में शहबाज शरीफ सरकार से चल रही वार्ता तोड़ कर पूरे पाकिस्तान में हमले करने का एलान कर दिया। पाकिस्तान के अधिकारियों का इल्जाम है कि तालिबान टीटीपी का इस्तेमाल पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए कर रहा है, ताकि उससे वह अधिक से अधिक रियायतें हासिल कर सके।