पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय ने संघीय और प्रांतीय सरकारों को ईश निंदा के एक मामले में ईसाई महिला आसिया बीबी को बरी करने के विरोध में कट्टरपंथी इस्लामी गुटों द्वारा किए हिंसक प्रदर्शनों से प्रभावित हुए लोगों को एक महीने के भीतर मुआवजा देने का निर्देश दिया है।
‘द एक्स्प्रेस ट्रिब्यून न्यूजपेपर’ के अनुसार, पाकिस्तान के मुख्य न्यायाधीश साकिब निसार के नेतृत्व वाली शीर्ष अदालत की दो सदस्यीय पीठ ने शनिवार को उच्चतम न्यायालय की ‘लाहौर रजिस्ट्री’ में स्वत: संज्ञान के एक मामले की सुनवाई के बाद यह आदेश सुनाया।
मामला तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) की अगुवाई में तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी आंदोलन के दौरान हुए जानमाल के नुकसान से जुड़ा है। ट्रिब्यून ने कहा कि सुनवाई शुरू होने पर एक सरकारी अधिकारी ने प्रदर्शन के दौरान हुए नुकसान के आकलन पर एक रिपोर्ट सौंपी गई।
मुख्य न्यायाधीश ने पंजाब के महाधिवक्ता से कहा कि वह अदालत को बताए कि पीड़ितों को मुआवजा कैसे दिया जाएगा। महाधिवक्ता ने कहा कि संघीय मंत्रिमंडल ने 26.2 करोड़ रुपये के मुआवजे को मंजूरी दे दी है।