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Pakistan: नवाज शरीफ की उम्मीदों पर पानी फिरा, पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किया यह कानून

Fri, 11 Aug 2023 05:12 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

Pakistan: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की उम्मीदों पर उस वक्त पानी फिर गया, जब सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को सर्वसम्मति से अपने फैसले की समीक्षा प्रक्रिया में संशोधन करने वाले कानून को रद्द कर दिया।
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Pakistan: Nawaz sharif and Shahbaz Sharif - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की उम्मीदों पर उस वक्त पानी फिर गया, जब सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को सर्वसम्मति से अपने फैसले की समीक्षा प्रक्रिया में संशोधन करने वाले कानून को रद्द कर दिया। शीर्ष अदालत ने फैसला सुनाया कि उच्चतम न्यायालय (फैसले और आदेशों की समीक्षा) 2023 असंवैधानिक था। 

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इस कानून का उद्देश्य सर्वोच्च न्यायालय को अपने फैसलों और आदेशों की समीक्षा करने की अपनी शक्तियों का उपयोग करने में सुविधा प्रदान करना और मजबूत करना है। पाकिस्तान की सरकार ने मई में शीर्ष अदालत द्वारा दोषसिद्धि के खिलाफ अपील का अधिकार अपने मूल अधिकार क्षेत्र के तहत प्रदान करने के लिए कानून लागू किया था।

निवर्तमान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बड़े भाई नवाज को शीर्ष अदालत की पांच सदस्यीय पीठ ने 2017 में अयोग्य करार दिया था लेकिन वह अपील दायर नहीं कर सके क्योंकि शीर्ष न्यायालय के फैसले को चुनौती देने के लिए कोई कानून नहीं है। 


2018 में वह उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद जीवन भर के लिए सार्वजनिक पद धारण करने के अयोग्य हो गए। पाकिस्तान की एक अदालत द्वारा नवाज शरीफ (73 वर्षीय) को चार सप्ताह की राहत मिली थी, जिसके बाद वह इलाज के लिए नवंबर 2019 से लंदन में रह रहे हैं।

लगातार तीन बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रह चुके शरीफ लंदन रवाना होने से पहले अल-अजीजिया भ्रष्टाचार मामले में लाहौर की कोट लखपत जेल में सात साल कैद की सजा काट रहे थे। राजनेता जहांगीर तरीन को भी सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 62 के तहत अयोग्य घोषित कर दिया था।
 

जिओ न्यूज की खबर के अनुसार अगर आज फैसला याचिकाओं के पक्ष में आता तो नेशनल असेंबली का कार्यकाल पूरा होने के बाद देश में होने वाले आम चुनावों के बीच अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए दोनों नेताओं के पास अपनी अयोग्यता को चुनौती देने का अवसर होता।
 

मुख्य न्यायाधीश (सीजेपी) उमर अता बंदियाल की अध्यक्षता वाली न्यायमूर्ति इजाजुल अहसन और न्यायमूर्ति मुनीब अख्तर की तीन सदस्यीय पीठ ने इस विवादास्पद कानून को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई की। विस्तृत फैसले में कहा गया है कि यह कानून संसद की विधायी क्षमता से परे होने के बावजूद 'संविधान के प्रतिकूल और उसके खिलाफ' है। आदेश में कहा गया है, 'तदनुसार इसे अमान्य करार दिया जाता है और इसका कोई कानूनी प्रभाव नहीं है।'
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आदेश में कहा गया है कि सामान्य कानून के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों और अधिकार क्षेत्र के दायरे में हस्तक्षेप करने का कोई भी प्रयास, जिसमें इसकी समीक्षा क्षेत्राधिकार तक सीमित नहीं है, संविधान का गलत और गलत पठन और व्याख्या होगी।
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