पाकिस्तान की खैबर-पख्तूनख्वा प्रांतीय सरकार ने रविवार को कुर्रम जिले के अशांत इलाकों में अभियान शुरू किया है। बता दें कि, इन इलाकों में उपद्रवियों का आतंक बड़े पैमाने पर व्यापत है। हाल ही में हथियारबंद लोगों ने पाराचिनार में सामान ले जा रहे एक सहायता काफिले पर हमला किया और कई लोगों की हत्या कर दी। उन्होंने कहा कि यह अभियान निचले कुर्रम जिले के चार ग्राम परिषदों में शुरू हुआ, जिसमें बागान, मंडोरी, चपरी और चपरीपाओ शामिल हैं, ताकि सड़कों को सुरक्षित किया जा सके और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित की जा सके, जहां नवंबर से सांप्रदायिक झड़पों में दर्जनों लोग मारे गए हैं।
कुर्रम जिले के चार गांवों में अभियान
एक अधिकारी ने बताया कि यह अभियान निचले कुर्रम जिले के चार ग्राम परिषदों में शुरू हुआ, जिसमें बागान, मंडोरी, चपरी और चपरीपाओ शामिल हैं, ताकि सड़कों को सुरक्षित किया जा सके और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित की जा सके, जहां नवंबर से सांप्रदायिक झड़पों में दर्जनों लोग मारे गए हैं।
आतंकवादियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का फैसला
मामले में केपीके सरकार के प्रवक्ता ने आधिकारिक तौर पर अशांत कुर्रम जिले के अशांत इलाकों में अभियान शुरू करने की घोषणा की है। यह फैसला एक उच्च स्तरीय बैठक में लिया गया, जिसमें केपीके के मुख्य सचिव, आईजी पुलिस और अन्य नागरिक और पुलिस अधिकारी शामिल हुए। इस बैठक में बिना किसी भेदभाव के आतंकवादियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का फैसला किया गया। अधिकारियों ने कहा कि राज्य शांतिपूर्ण तत्वों का समर्थन करता है और उत्पीड़कों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।
पुलिस और नागरिक प्रशासन की सहायता करेंगे सुरक्षा बल
एक स्थानीय अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, डिप्टी कमिश्नर अशफाक अहमद ने शनिवार को विस्थापित लोगों के लिए थाल और हंगू में शिविर स्थापित करने के लिए अधिसूचना जारी की। सुरक्षा बल उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई में पुलिस और नागरिक प्रशासन की सहायता करेंगे। अधिकारियों ने कहा कि सरकार को संदेह है कि कुछ उपद्रवियों ने नागरिकों के बीच घुसपैठ की है। पिछले साल नवंबर से शिया और सुन्नी जनजातियों के बीच सांप्रदायिक झड़पों में कम से कम 130 लोगों की जान चली गई है, इस क्षेत्र में हफ्तों तक सड़क जाम रहने के कारण भोजन और दवा की कमी की खबर है।
नए साल पर जनजातियों के बीच हुआ था शांति समझौता
1 जनवरी को युद्धरत जनजातियों के बीच शांति समझौता हुआ, लेकिन पाराचिनार को जोड़ने वाला मार्ग अवरुद्ध रहा। शांति समझौते के तहत, निवासियों ने 15 दिनों के भीतर कई चरणों में अपने हथियार राज्य को सौंपने का वचन दिया, जबकि स्थानीय बंकरों को फरवरी 2025 तक खत्म किया जाना है। हालांकि, जनवरी में कुर्रम जिले में सहायता काफिलों पर बार-बार हमला किया गया, जिसके कारण लोग हताहत हुए।
हालिया हमले में आठ लोगों की मौत
गुरूवार को पाराचिनार जा रहे 35 वाहनों के सहायता काफिले पर बागान में हमला किया गया, जिसमें पांच चालक, एक यात्री और दो सुरक्षाकर्मी मारे गए। एक रिपोर्ट के अनुसार, जिला प्रशासन ने कहा था कि जवाबी कार्रवाई और हेलीकॉप्टर गोलाबारी में छह हमलावर मारे गए, हालांकि कुछ लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। व्यापार समुदाय के अनुसार, 35 में से 33 ट्रकों को बागान और आसपास के इलाकों में ले जाया गया और 12 वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। पाराचिनार, ऊपरी कुर्रम, पिछले 110 दिनों से घेराबंदी में है, जहां आवश्यक आपूर्ति की कमी के कारण लोग मर रहे हैं। समुदाय ने सरकार से स्थिति को संभालने के लिए तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया है।