सहयोगी दलों के प्रमुखों ने की शहबाज सरकार की सराहना
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने कार्यवाहक व्यवस्था और नौ अगस्त को नेशनल असेंबली को भंग करने पर सहयोगी दलों के नेताओं को विश्वास में लिया। सत्तारूढ़ गठबंधन के सूत्रों ने बताया कि विचार-विमर्श के बाद सहयोगी दलों के प्रमुखों ने शहबाज की करीब 15 महीने की सरकार की सराहना की और उनके नेतृत्व पर संतोष जताया।
पिछले साल अप्रैल में प्रधानमंत्री बने थे शहबाज शरीफ
शहबाज शरीफ पिछले साल अप्रैल में तब प्रधानमंत्री बने थे, जब नेशनल असेंबली ने तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित किया था और उन्हें शीर्ष पद से हटा दिया गया था। खान की पीटीआई पार्टी ने 2018 में पिछला आम चुनाव जीता था। सूत्रों ने बताया कि बैठक के दौरान सत्तारूढ़ गठबंधन के नेतृत्व ने कार्यवाहक प्रधानमंत्री के लिए अलग-अलग नामों पर विचार-विमर्श किया और भविष्य की रणनीति के बारे में अलग-अलग सुझाव दिए। सत्तारूढ़ गठबंधन ने कार्यवाहक ढांचे के संबंध में कई बैठकें की हैं, लेकिन अभी तक किसी निर्णय पर नहीं पहुंचा है।
राष्ट्रपति द्वारा सलाह पर हस्ताक्षर के बाद भंगे होगी असेंबली
शरीफ ने गुरुवार रात को सहयोगी दलों के नेताओं से औपचारिक रूप से कहा था कि वह नौ अगस्त को नेशनल असेंबली को भंग करने के लिए राष्ट्रपति को सलाह भेजेंगे और उम्मीद करते हैं कि तब तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री के नाम पर आम सहमति बन जाएगी। देश के संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति द्वारा सलाह पर हस्ताक्षर करते ही नेशनल असेंबली भंग हो जाएगी।
नेशनल असेंबली भंग करने को लेकर संविधान में क्या प्रावधान
संविधान के अनुच्छेद 58 (नेशनल असेंबली का विघटन) में कहा गया है कि राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की सलाह पर नेशनल असेंबली को भंग कर देगा; और नेशनल असेंबली जब तक कि जल्दी भंग न हो जाए, प्रधानमंत्री की सलाह के 48 घंटे बाद भंग हो जाएगी। इस कदम से पाकिस्तान में 90 दिनों के भीतर आम चुनाव हो जाएंगे। संविधान में प्रावधान है कि यदि विधानसभा अपना कार्यकाल पूरा कर लेती है तो चुनाव 60 दिनों में कराए जाने हैं, लेकिन समय से पहले भंग होने की स्थिति में इस अवधि को 90 दिनों तक बढ़ा दिया जाता है।
कार्यवाहक प्रधानमंत्री के लिए इन नामों पर हो रही चर्चा
अखबार ने कहा कि जिन लोगों के नामों की चर्चा है उनमें पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी, बलूचिस्तान से निर्दलीय सांसद असलम भूटानी, पूर्व वित्त मंत्री हफीज शेख और प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव फवाद हसन शामिल हैं। शुरुआत में कार्यवाहक प्रधानमंत्री पद के लिए मौजूदा वित्त मंत्री इशाक डार के नाम को प्रमुखता मिली थी लेकिन पीपीपी ने इस पर आपत्ति जताई थी। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि डार अभी भी दौड़ में हैं या नहीं क्योंकि प्रधानमंत्री शहबाज ने न तो उनके नाम को खारिज किया है और न ही आपत्ति जताई है।
कुछ नेताओं ने कहा- नवाज शरीफ करेंगे नाम पर अंतिम फैसला
खबर के मुताबिक, सत्तारूढ़ गठबंधन के कई नेताओं ने यह कहने में संकोच नहीं किया कि कार्यवाहक प्रधानमंत्री के बारे में अंतिम फैसला प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के भाई नवाज शरीफ करेंगे। कार्यवाहक प्रधानमंत्री के नाम पर चल रहे विचार-विमर्श पर टिप्पणी करते हुए एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि यह कवायद औपचारिकता से ज्यादा कुछ नहीं है क्योंकि यह फैसला गठबंधन दलों के बड़े नेता करेंगे और प्रधानमंत्री को इससे अवगत कराया जाएगा।