अपदस्थ पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने प्रधानमंत्री इमरान खान पर तंज कसते हुए कहा कि क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान को भारत में कठपुतली नेता कहा जाता है, क्योंकि उन्हें 2018 में शक्तिशाली सेना द्वारा स्थापित किया गया था। वर्तमान में लंदन में दिल की बीमारी का इलाज करा रहे नवाज ने गुरुवार को लाहौर में आयोजित पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) की आम बैठक में वीडियो लिंक के जरिए शिरकत की।
सेना की मदद से सत्ता में आए इमरान खान
नवाज ने कहा कि भारत में इमरान खान को कठपुतली कहा जाता है और अमेरिका में कहा जाता है कि इमरान के पास मेयर से भी कम शक्तियां हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि दुनिया जानती है कि उन्हें कैसे सत्ता में कैसे लाया गया है। इमरान जनता के वोटों से नहीं बल्कि सैन्य प्रतिष्ठान की मदद से सत्ता में आए हैं।
पाकिस्तान में भ्रष्टाचार के दो मामलों में दोषी 71 वर्षीय शरीफ नवंबर 2019 से लंदन में रह रहे हैं जब लाहौर उच्च न्यायालय ने उन्हें उपचार के लिए चार सप्ताह के लिए विदेश जाने की अनुमति दी थी। इससे पहले पार्टी की बैठक में शरीफ ने 2018 में आम चुनाव में धांधली के जरिए पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की कठपुतली सरकार थोपने के लिए सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा और पूर्व आईएसआई प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फैज हमीद पर कटाक्ष किया। शरीफ ने कहा कि यह आदमी (इमरान खान) कहता था कि वह आईएमएफ में जाने की बजाए आत्महत्या करना पसंद करेगा। अब हम इंतजार कर रहे हैं कि वह कब आत्महत्या करेगा।
अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने के लिए इमरान को देश पर थोपा गया
पीटीआई सरकार 2018 से सत्ता में अपने पहले तीन वर्षों में पहले ही विदेशी सरकारों और संस्थानों से 34 बिलियन अमरीकी डॉलर से अधिक के ऋण का अनुबंध कर चुकी है। शरीफ ने कहा कि नए पाकिस्तान के नाम पर इमरान खान जैसे अयोग्य और अक्षम लोगों को देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने के लिए देश पर थोपा गया। न संविधान न ही शपथ का सम्मान नहीं किया जाता। यहां तक कि लोगों की राय को भी बंधक बनाकर रखा जाता है। अगर पाकिस्तान को समृद्धि की ओर बढ़ना है तो अतीत से सबक लेने की जरूरत है। अगर हमें देश के गौरव के दिनों को वापस लाना है, तो हमें लोगों को मताधिकार का अधिकार देना होगा।
पूर्व विदेश मंत्री और शरीफ के करीबी ख्वाजा आसिफ ने कहा कि मैं जानता हूं कि इमरान खान कितने बहादुर हैं। हम जानते हैं कि किसके समर्थन (सैन्य प्रतिष्ठान) पर वह एक साहसी चेहरा रखता है और अपने राजनीतिक विरोधियों को चुनौती देते हैं। इमरान जब (जनरल परवेज मुशर्रफ के शासनकाल में) चार-पांच दिनों के लिए जेल गए थे तो वह सलाखों के पीछे रोते थे। यह देख तत्कालीन सरकार ने उन्हें रिहा कर दिया था।