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Pakistan: 'PTI के प्रदर्शन के दौरान तैनात सुरक्षाबलों के पास नहीं थे गोला-बारूद'; सरकार ने खारिज किए हत्यारोप

Mon, 02 Dec 2024 12:13 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

पाकिस्तानी गृह मंत्रालय ने इमरान खान के समर्थकों द्वारा पिछले सप्ताह किए गए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों पर हत्याओं का आरोप खारिज किया। गृह मंत्रालय ने तर्क दिया कि भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाकर्मियों को बिना गोला-बारूद के तैनात किया गया था। 
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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर पिछले सप्ताह पाकिस्तान भर में हिंसा भड़की। इस हिंसा में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर प्रदर्शनकारियों की हत्या का आरोप भी लगा। इसी सिलसिले में पाकिस्तानी गृह मंत्रालय ने रविवार को इमरान खान के समर्थकों द्वारा पिछले सप्ताह किए गए हिंसक विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों पर हत्याओं का आरोप खारिज किया।
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आरोप खारिज करते हुए पाकिस्तानी गृह मंत्रालय ने तर्क दिया कि भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षाकर्मियों को बिना गोला-बारूद के तैनात किया गया था। बता दें कि पीटीआई ने 24 नवंबर को इस्लामाबाद के रेड जोन में धरना दिया, जहां कई सरकारी इमारतें स्थित हैं। इसके साथ ही पार्टी ने दावा किया कि सुरक्षा बलों ने गोलीबारी की, जिससे कई समर्थक मारे गए।

गृह मंत्रालय ने आरोपों को बताया झूठा
गृह मंत्रालय ने एक बयान में पीटीआई के आरोपों को झूठा बताया। बयान में कहा गया पुलिस और रेंजर्स जैसी कानून लागू करने वाली एजेंसियों (LEA) को बिना गोला-बारूद के तैनात किया गया था, जबकि सेना दंगों पर नियंत्रण के लिए नहीं भेजी गई थी। मंत्रालय ने बताया कि हिंसक प्रदर्शनकारियों ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी की, जबकि पीटीआई के नेता मौके से भाग गए। 
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गृह मंत्रालय ने पीटीआई पर लगाया आरोप
पाकिस्तानी मंत्रालय ने आरोप लगाया कि पीटीआई ने सोशल मीडिया पर झूठे प्रचार किए और कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा मारे गए लोगों के बारे में झूठ फैलाया। बयान में कहा गया कि राजधानी के अस्पतालों ने इन घटनाओं की सही जांच के बाद गोलीबारी की खबरों को खारिज कर दिया।

पीटीआई ने न्यायालय के आदेशों का उल्लघन किया- मंत्रालय
इसके अलावा, मंत्रालय ने बताया कि इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने 21 नवंबर को सरकार को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए थे और पीटीआई से विरोध प्रदर्शन रोकने के लिए कहा था। बावजूद इसके, पार्टी ने अदालत के आदेशों का उल्लंघन किया और रेड जोन में घुसने की कोशिश की। 

मंत्रालय का दावा
गृह मंत्रालय ने कहा कि प्रदर्शनकारियों ने आग्नेयास्त्रों, स्टन ग्रेनेड, आंसू गैस के गोले और अन्य हथियारों का इस्तेमाल किया और कानून प्रवर्तन एजेंसियों पर हमला किया। मंत्रालय ने यह भी दावा किया कि खैबर पख्तूनख्वा सरकार के संसाधनों से हिंसक प्रदर्शनकारियों को मदद मिल रही थी, जिनमें कई अवैध अफगान नागरिक भी शामिल थे। 

हिंसा में 1500 प्रशिक्षित लड़ाके थे शामिल- मंत्रालय
बयान में यह भी कहा गया कि इन हिंसक तत्वों में लगभग 1,500 प्रशिक्षित लड़ाके शामिल थे, जो पीटीआई के नेता मुराद सईद के तहत काम कर रहे थे, जिन्हें अदालत ने भगोड़ा और अपराधी घोषित किया है। इन प्रदर्शनकारियों ने उग्रवादी रणनीतियों का इस्तेमाल करते हुए सुरक्षा बलों पर हमला किया, लेकिन सुरक्षा कर्मियों ने संयम का प्रदर्शन किया।
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