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Pakistan: अदालत ने राजद्रोह मामले में फवाद चौधरी को दी जमानत, पिछले हफ्ते हुई थी गिरफ्तारी

Wed, 01 Feb 2023 06:58 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद

सार

पाकिस्तान के चुनाव आयोग के सचिव की शिकायत पर इस्लामाबाद के कोहसर पुलिस थाने में उनके खिलाफ चुनाव आयोग के सदस्यों और उनके परिवारों को धमकी देने का मामला दर्ज किया गया था।
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फवाद चौधरी (फाइल फोटो) - फोटो : फेसबुक
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विस्तार
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एक अदालत ने बुधवार को पूर्व सूचना मंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के वरिष्ठ नेता फवाद चौधरी को राजद्रोह के मामले में जमानत दे दी है। इसके साथ ही अदालत ने उनकी रिहाई का आदेश दिया है।

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पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के करीबी सहयोगी चौधरी (52 वर्षीय) को पिछले हफ्ते लाहौर में उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था। पाकिस्तान के चुनाव आयोग (ईसीपी) के सचिव की शिकायत पर इस्लामाबाद के कोहसर पुलिस थाने में उनके खिलाफ चुनाव आयोग के सदस्यों और उनके परिवारों को धमकी देने का मामला दर्ज किया गया था।

अतिरिक्त सत्र अदालत के न्यायाधीश फैजान गिलानी ने बुधवार को चौधरी को राजद्रोह के मामले में 20,000 रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी। न्यायाधीश ने कहा कि उन्होंने इस शर्त पर जमानत स्वीकार की कि चौधरी अपने उस आरोप को नहीं दोहराएंगे जिसके कारण उनकी गिरफ्तारी हुई और मामला दर्ज किया गया। उन्होंने कहा, 'मैं इस शर्त पर जमानत दे रहा हूं कि फवाद चौधरी इस तरह की टिप्पणी नहीं दोहराएं।
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चौधरी चुनाव आयोग के सदस्यों को सार्वजनिक रूप से 'धमकी' देने के लिए राजद्रोह के आरोपों का सामना कर रहे हैं। हिरासत में लिए गए पीटीआई प्रवक्ता, पार्टी प्रमुख इमरान खान द्वारा बताई गई पार्टी की नीति और उद्देश्यों को उजागर करने में मुखर रहे हैं। पीटीआई ने उनकी गिरफ्तारी को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया था और उनकी रिहाई की मांग कर रही थी।

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पाकिस्तान में धार्मिक मंत्री को घृणा बढ़ाने पर हटाने की मांग

पाकिस्तान में ईसाई समुदाय के नेताओं ने अंतरधार्मिक सद्भाव के नाम पर धार्मिक घृणा फैलाने के लिए मजहबी मामलों के मंत्री मुफ्ती अब्दुल शकूर को हटाने की मांग की है। शकूर ने देश में जबरन धर्मांतरण के मुद्दे पर चर्चा के लिए एक सेमीनार में भाग लिया था। इसमें जानबूझकर भाषण देने के लिए उन लोगों को बुलाया गया जो हिंदू या ईसाई धर्म बदलकर मुसलमान बने थे। ऐसा इसलिए ताकि वे अपने धर्मों के खिलाफ बोल सकें। लेकिन ईसाई धर्म से जुड़े लोगों ने आवाज उठाई और समारोह का बहिष्कार किया। इसके बाद पाकिस्तान के ईसाई नेताओं ने आपसी सौहार्द के नाम पर धार्मिक घृणा करने के आरोप में मुफ्ती अब्दुल शकूर को मंत्रालय से हटाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम सिर्फ अल्पसंख्यकों और उनकी धार्मिक प्रथाओं के खिलाफ नफरत पैदा करने के लिए आयोजित किया गया था।
 
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