रूस में भूकंप के बाद सुनामी का खतरा
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क्यों घातक है रूस के इस इलाके में आने वाला भूकंप
रूस के पूर्वी छोर पर स्थित कामचटका प्रायद्वीप पृथ्वी के सबसे खतरनाक भूगोल वाले इलाकों में गिना जाता है। शनिवार को फिर से यहां 7.4 तीव्रता का भीषण भूकंप दर्ज किया गया। लगभग 1,200 किलोमीटर लंबा यह प्रायद्वीप प्रशांत रिंग ऑफ फायर का हिस्सा है, जहां टेक्टॉनिक प्लेटों की लगातार हलचल और ज्वालामुखीय गतिविधियां आम हैं।
यही कारण है कि कामचटका को भूकंप और ज्वालामुखी के लिहाज से दुनिया के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में रखा जाता है। कामचटका में भूगर्भीय, जलवायु और समुद्री सभी तरह की आपदाएं साथ-साथ दिखाई देती हैं। इससे इसे रूस का आपदा-हॉटस्पॉट कहा जाता है और अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्थान लगातार इस क्षेत्र की निगरानी करते रहते हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि कामचटका के नीचे प्रशांत प्लेट और उत्तरी अमेरिकी प्लेट के साथ-साथ ओखोत्स्क माइक्रोप्लेट की टकराहट होती है। यही कारण है समय-समय पर बड़े भूकंप आते रहते हैं। इससे पहले 20 जुलाई को यहां भूकंप के कई बड़े झटके लगे थे।
भूकंप के झटके (सांकेतिक)
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टेक्टॉनिक प्लेटों के बीच लगातार हलचल से रूस के इस क्षेत्र में आते रहते हैं भूकंप
कामचटका के दक्षिणी हिस्से में कुरिल-कामचटका ट्रेंच मौजूद है, जहां प्रशांत प्लेट समुद्र तल के नीचे खिसककर ओखोत्स्क प्लेट के नीचे धंसती है। इसे सबडक्शन जोन कहते हैं और यही बड़े भूकंपों की मुख्य वजह है। प्रशांत प्लेट लगातार उत्तर-पश्चिम की ओर खिसक रही है और ओखोत्स्क माइक्रोप्लेट के नीचे धंस रही है। इस टकराव से भारी दबाव बनता है।
भूकंप के झटके (प्रतीकात्मक)
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